बहुत सारे नवबौद्ध यह भ्रम फैलाते हैं कि बुद्धिज्म के पहले ब्राम्हण नहीं थे,और न ही वेद थे।
ऐसे लोगों के लिए आज हम बाबा साहेब के राइटिंग से ये प्रमाण देगे।
बाबा साहेब की पुस्तक द बुद्धा एंड धम्म बाबा साहेब डॉ अम्बेडकर ने स्वयं अपनी राइटिंग में बुद्धिज्म के पहले ब्राम्हण और वेद का प्रमाण दिया।
1957 में सिद्धार्थ कालेज प्रकाशन से प्रकाशित प्रथम संस्करण के पेज नंबर 9 में भगवान बुद्ध की शिक्षा के बारे में लिखा की
“वे आठ ब्राह्मण जिन्हें शुद्धोधन ने महामाया के स्वप्न की व्याख्या करने के लिए आमंत्रित किया था और जिन्होंने उनके भविष्य की भविष्यवाणी की थी, उनके प्रथम शिक्षक थे।जब वे उसे अपनी सारी शिक्षा दे चुके, तो शुद्धोदन ने उद्दिक्क देश के उच्च कुल के, प्रतिष्ठित भाषाशास्त्री और व्याकरणशास्त्री, वेदों, वेदांगों और उपनिषदों के ज्ञाता, सब्बमित्त को बुलवाया। स्वर्ण कलश से समर्पण का जल उंडेलकर, शुद्धोदन ने बालक को शिक्षा के लिए उसके अधीन कर दिया। वह उसका दूसरा गुरु थे।”

1957 Page No 9
इस संदर्भ से स्पष्ट होता है कि बुद्ध के पहले भी वेद,वेदांग, उपनिषद थे और स्वयं बुद्ध ने इनकी शिक्षा ली।
बाबा साहेब डॉ अम्बेडकर की पुस्तक Who Were The Shudras में ये संदर्भ मिलता है कि वेद के पुरूष सुक्त को बुद्ध भी नहीं हिला पाए, बौद्ध काल में भी पुरुष सुक्त का प्रचार और विस्तार हुआ।
बाबा साहेब डॉ अम्बेडकर ने अपनी पुस्तक Who Were The Shudras के पेज नंबर 4 में लिखा है कि
“पुरुष सूक्त द्वारा निर्धारित सामाजिक व्यवस्था पर बुद्ध के अलावा किसी ने कभी प्रश्न नहीं उठाया। यहाँ तक कि बुद्ध भी इसे हिला नहीं पाए, इसका सीधा सा कारण यह था कि बौद्ध धर्म के पतन के बाद और बौद्ध धर्म के काल में भी पर्याप्त विधि-निर्माता थे, जिन्होंने न केवल पुरुष सूक्त के आदर्श की रक्षा करना, बल्कि उसका प्रचार और विस्तार करना भी अपना कर्तव्य समझा।”

बाबा साहेब डॉ अम्बेडकर के इस संदर्भ से भी सिद्ध होता है कि बुद्ध के पहले वेद थे।
बाबा साहेब डॉ अम्बेडकर अपनी पुस्तक द बुद्धा एंड हिज धम्म के पेज नंबर 3 और 4 में ब्राम्हणों का उल्लेख देते हुए लिखते हैं कि
“11.अगली सुबह महामाया ने अपना स्वप्न शुद्धोदन को सुनाया। स्वप्न की व्याख्या न जानते हुए, शुद्धोदन ने आठ ब्राह्मणों को बुलाया जो भविष्य बताने में माहिर थे।
12. वे राम, धागा, लक्कन, मंति, यन्न, सुयामा, सुभोग और सुदत्त थे और उनके लिए एक उपयुक्त स्वागत की तैयारी की गई थी।
13. उसने ज़मीन पर उत्सव के फूल बिछाए और उनके लिए ऊँची कुर्सियाँ तैयार कीं।
14. उसने ब्राह्मणों के पात्र सोने और चाँदी से भर दिए और उन्हें घी, मधु, शक्कर, उत्तम चावल और दूध से पके पकवान खिलाए। उसने नए वस्त्र और कपिला गायें जैसी अन्य भेंटें भी उन्हें दी।”

1957 Page No 3 and 4
बाबा साहेब के इस संदर्भ से स्पष्ट होता है कि बुद्ध के पहले भी ब्राम्हण थे और बुद्ध के पिता ब्राम्हणो का सम्मान करते थे। ब्राम्हण को दान देते थे और ब्राम्हण भोज भी करवाते थे।
उपसंहार
बाबा साहेब डॉ अम्बेडकर के राइटिंग के संदर्भो से स्पष्ट होता है कि बुद्ध के पहले वेद, ब्राम्हण, उपनिषद,वेदांग थे।बुद्ध ने स्वयं वेद,वेदांग, उपनिषद की शिक्षा ली।बुद्ध के प्रथम गुरु ब्राम्हण थे।बुद्ध के पिता ने ब्राम्हणों का सम्मान किया, ब्राम्हण भोज और ब्राम्हण को दान दिया।



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