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यूरोप में विच हंटिंग की अमानवीय प्रथा

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विच हंटिंग का इतिहास

विच हंटिंग अर्थात महिलाओं को डायन या चुडैल का आरोप लगाकर उन्हें मार देना है। विच हंटिंग का इतिहास यूरोप में बहुत प्राचीन है।लेमनोस की थियोरिस नाम की महिला को 323 ईसा पूर्व इसलिए मार दिया गया क्योंकि उस पर आरोप था कि वो एक डायन है। थियोरिस एक ग्रीक महिला थीं जो एथेंस में रहती थी।रोम में 5 शताब्दी ईसा पूर्व, फसल चुराने व हत्या करने वाली डायन या चुड़ैल को दंड का प्रावधान किया गया ।331 ईसा पूर्व में, रोम में एक घातक महामारी आई।महामारी के आरोप में 170 महिलाओं को जहर देकर मार दिया गया। इन पर आरोप था कि इन्होंने जादू करके महामारी फैलाई।
184-180 ईसा पूर्व में, इटली में एक और महामारी फैली और लगभग 5,000 लोगों पर मुकदमा चलाया गया और उन्हें फाँसी दे दी गई।हाइपेटिया जो कि अलेक्जेंड्रिया पूर्वी रोम की एक महिला थीं। एवं शिक्षण कार्य करती थी,परंतु 415 ईस्वी में ईसाई भीड़ द्वारा हत्या कर दी गई। यह कहा गया कि यह एक डायन है।इस घटना को जर्मन लेखक विल्हेम गोटलिब सोल्डन ने हिस्ट्री ऑफ द विचक्राफ्ट ट्रायल्स में लिखा।

एग्नेस वॉटरहाउस

एग्नेस वाटरहाउस को , 29 जुलाई 1566 डायन होने के आरोप पर फांसी दी गई।

डेमोनोलाजी

स्काटलैंड के राजा किंग जेम्स ने डेमोनोलाजी नाम से एक पुस्तक लिखी। यह पुस्तक 1597 में प्रकाशित हुई।इस पुस्तक में जादू,टोना व डायन,चुड़ैल आदि से निपटने के लिए तरीके लिखे गए।यह पुस्तक डायन,चुड़ैल को मारने का समर्थन करती है।स्काटलैंड और इंग्लैंड में 15 से 16 शताब्दी के बीच 60000 महिलाओं को डायन कहकर मार दिया गया। 15000 को फांसी दी गई शेष को जलाकर मार दिया गया।

विच हंटिंग पर बने कानून
1542 में संसद ने जादू टोना अधिनियम पारित किया जिसमें जादू टोना को मौत की सजा वाले अपराध के रूप में परिभाषित किया गया।1604 में जेम्स प्रथम के शासनकाल के दौरान एक और कानून पारित किया गया था।इस कानून के तहद चुडैल और डायन संबंधित अपराध को चर्च में सुनवाई और सजा देने का अधिकार दे दिया गया।आप यहां देख सकते हैं कि महिलाओं को डायन या चुड़ैल होने के शक पर उन्हें सजा देने का अधिकार चर्च को दे दिया गया।आमतौर पर जादू टोना डायन चड़ैल आदि के खिलाफ बने कानून में, आरोप लगाने वाले को सजा होती है एवं पीड़ित महिला को संरक्षण प्रदान किया जाता है परंतु ब्रिटेन के कानून महिला को ही डायन चुड़ैल आदि मानकर मौत की सजा देती है।

विच हंटिंग के नामजद केस

यूरोप में डायन, चुड़ैल होने के शक लाखों महिलाओं को मार दिया गया।हम यहां कुछ नामजद केस बता रहे हैं।

(1)कैथरीन हेस ब्रिटिश महिला थी जिसे डायन होने के संदेह में 1726 में जिंदा जला दिया गया था।

(2) 9 सितंबर 1645 को मैरी लेकलैंड को डायन होने के आरोप में जिंदा जला दिया गया।
(3) 1590 में किंग्स लिन की मार्गरेट रीड को डायन होने के शक पर जिंदा जलाया गया।
(4) 1659 में नॉर्विच की मैरी ओलिवर को डायन होने के आरोप पर जिंदा जलाया गया।
(5)1716 में मैरी हिक्स को डायन होने के आरोप में फांसी दी गई।
(6) जेन वेन्हम को 1730 में डायन होने के आरोप पर इंग्लैंड में फांसी दी गई।
(7) ऐलिस सैम्युएल पर 1589 और 1593 के बीच इंग्लैंड के फैंस के वॉरबॉयज गांव में व में जादू टोना करने का आरोप लगाया गया था और उन्हें मार डाला गया था।
(8) 1612 में पेंडले चुड़ैलों का परीक्षण अंग्रेजी इतिहास में सबसे प्रसिद्ध चुड़ैल परीक्षणों में से एक है। इसमें दस महिलाओं को फांसी दी गई।

(9) इंग्लैंड मैरी पन्नल महिला को 1603 में जादू-टोना करने का आरोप लगाया गया और फांसी दी गई।
(10)उर्सले केम्प उर्फ ग्रे एक अंग्रेज महिला जिस पर 1582 में जादू-टोना करने का मुकदमा चलाया गया और फाँसी दे दी गई।
(11)ऐलिस नट्टर जो कि  एक अंग्रेज महिला थी जिस डायन का आरोप लगाया गया था और उन्हे 20 अगस्त 1612 फाँसी पर लटका दिया गया था।

(12) रूथ ओसबोर्न एक अंग्रेज महिला थी जिस पर डायन होने का आरोप लगाया गया था। भीड़ ने 1751 मार डाला।

यूरोप में महिलाओं को डायन,चुड़ैल होने के शक पर सजा देने का चित्रण

विचफाइंडर जनरल” मैथ्यू हॉपकिंस

यूरोप में बहुत से लोग विच फाइंडर का पेशा करते थे। ये पेशेवर विच फाइंडर डायन,चुड़ैल का पता लगाते थे।और जिन महिलाओं पर डायन‌ होने का शक होता था फिर उन पर ट्रायल चलाया जाता था और फिर उन्हें मौत की सजा दी जाती थी। महिलाओं में विच ट्रायल चलाने के लिए कई ऊटपटांग नियमों का सहारा लिया जाता था।विच का पता लगाने के लिए कई सारी पुस्तकें लिखी गई उनका भी सहारा लिया जाता था। मैथ्यू हॉपकिंस एक पेशेवर विच फाइंडर था। जिसने हजारों महिलाओं को चुड़ैल सिद्ध किया और उन्हें मौत की सजा दिलवाई।

मैलियस मेलिफ़िकारम’ जिसे ‘द हैमर ऑफ़ विचेज़’,भी कहा जाता है।यह ग्रंथ दानव विज्ञान का एक लोकप्रिय ग्रंथ था।जो कि रिलीजन के सिद्धांतों के आधार पर लिखा गया। दानव विज्ञान पर स्काटलैंड के राजा भी पुस्तक लिख चुके थे। परंतु मैलियस मेलिफ़िकारम’चुड़ैलों से निपटने के लिए यूरोप में एक लोकप्रिय पुस्तक बनी।को बढ़ावा इस पुस्तक को हेनरिक क्रेमर द्वारा लिखा गया, यह 1497 में जर्मनी से प्रकाशित हुआ था।इस पुस्तक के आधार चुड़ैल होने के शक वाली महिलाओं पर ट्रायल चलाया गया और उन्हें मार दिया गया।

वर्तमान में विच हंटिंग केस

ब्रिटिश और यूरोप में आज भी विच हंटिंग के केस मिलते हैं। यूरोप के समाज में चुड़ैल की मान्यता अभी नहीं गई है। ब्रिटेन में विचक्राफ्ट के केस बढ़े हैं। बीबीसी और इंडिपेंडेंट ने इस पर खबर भी प्रकाशित की है। इन खबरों में ये बताया गया है कि ब्रिटेन विचक्राफ्ट के केस बढ रहें हैं।

इंडिपेंडेंट की खबर
बीबीसी की खबर

उपसंहार

यहां स्पष्ट होता है कि ब्रिटेन और यूरोप में महिलाओं का चुडैल डायन मान कर उन्हें यातनाएं दी गई उन्हें जिंदा जलाया गया या फांसी देकर उनकी हत्या की गई। ब्रिटेन और यूरोप के समाज में चुड़ैल या डायन की मान्यता बहुत प्राचीन थी।जब ब्रिटिश जब बाहर गए, दूसरे देशों को गुलाम बनाया, तो अपनी ये कुरीतियां भी उन देशों में थोपने की कोशिश की।आज भी ब्रिटिश मुवी ,बुक आदि फिक्शन में जादू टोना चुडैल आदि का ही प्रस्तुति बहुत अधिक मात्रा में की जाती है।जिससे ये सब समाज में आज भी फैल रहा है।वर्तमान ब्रिटेन में लगातार जादू टोना चुड़ैल आदि के केस आ रहे है। हत्याए हो रही है। जो साफ संकेत देता है कि ब्रिटिश समाज में आज भी जादू टोना चुड़ैल डायन पर विश्वास करने वाले मौजूद है।


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One response to “यूरोप में विच हंटिंग की अमानवीय प्रथा”

  1. Yes, sanatan samiksha team’ ies theory ko tod madode kr sati patha ko hum bhartiya log ke matthe thop diya gya hai.
    Aapki yogdan sarahniya hai.
    Dhanyawad sanatan samiksha ka jinhone itna hard work kiya hamari Sanskriti and history ko ujjagar krne me.

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