जैसे ही भारत में शासन के लिए विदेशी आक्रमणकारी आना शुरू हुए उन्होंने भारत की संस्कृति को गहरा चोट पहुचाया
देवदासी का पतन ये ही से शुरू हुआ।
भारत की संस्कृति में नृत्य कला संगीत कला को सम्मान की दृष्टि से देखा जाता था उनका उनसे जुड़े कलाकारों को भी समाज में सम्मान था। देवदासी नृत्य और संगीत कला से जुड़ी थी। परंतु विदेशी आक्रमणकारी ने इस महत्व को नहीं समझा । खासकर मुगल शासन और ब्रिटिश शासन में नृत्य और संगीत को निष्कृष्ट कार्य माना गया। इन्हें नाचने वाली की और मनोरंजन की सामग्री मानी गई।अरब और यूरोप में उनकी धार्मिक मान्यता में भी नृत्य और संगीत को पाप माना गया।
मुगल आक्रमणकारी
मुगल शासन में सबसे ज्यादा मंदिर तोड़े गए। इससे मंदिर में कार्यरत देवदासी जिन्हें राजा का संरक्षण प्राप्त था और आर्थिक संपन्नता थी । ये दोनों देवदासी से छिन गई।
मंदिरो से इन्हें अलग कर दिया गया और इनके कला को कोई सम्मान या संरक्षण नहीं दिया गया।
तवायफ जो इस समय नाचने वाली हुआ करती थी देवदासी को इसी नजर से देखा गया।
इस तरह देवदासी का पतन होने लगा।
मुगल शासन में कितने मंदिर तोड़े गए ये अलग विषय है इसकी चर्चा हम यहां नहीं करेंगे।
ब्रिटिश शासन
जब भारत में ब्रिटिश शासन आया तो उन्होंने भारत की संस्कृति को नष्ट कर ब्रिटिश संस्कृति को भारत में डालने का प्रयास शुरू किया।
इसके लिए दो प्रमुख माडल बनाए गए। एक ओरिएंटलवाद दूसरी इंजीलवाद
ब्रिटिश संसद पर इंजील ईसाइयों का दबाव था जिसने 1813 में ईस्ट इंडिया कंपनी के चार्टर के नवीनीकरण में मिशनरी क्लॉज बनाया। इस क्लॉज ने भारत को मिशनरी गतिविधियों के लिए खोल दिया। इससे मिशनरियों की संख्या भारत में बढ़ती गई।
ओरिएंटलवाद के अनुसार भारतीय संस्कृति को नष्ट सीधे तौर पर न करके बल्कि हेरफेर के द्वारा ब्रिटिश संस्कृति को थोपना चाहिए।इस समूह का मानना था कि उपमहाद्वीप पर प्रभावी नियंत्रण के लिए स्थानीय परंपराओं, भाषाओं और राजनीतिक संरचनाओं का यथासंभव उपयोग और हेरफेर किया जाना चाहिए। जबकि एंजीलवादी मानते थे कि ब्रिटिश था; इस समूह का मानना था कि संस्कृति को सीधे तौर पर भारत में लागू करना चाहिए। इंजीलवादी कट्टर ईसाई प्रचारक थे। वे ईसाई मान्यताओं को लागू करने के पक्षधर थे।
भारतीय नृत्य संस्कृति को ब्रिटिशर द्वारा नष्ट करना
भारत में ब्रिटिशर ने ओरिएंटलवाद के अनुसार भारतीय संस्कृति में अतिक्रमण किया परंतु 1857 की क्रांति के बाद इंजीलवाद भी तरह ब्रिटिशर का झुकाव हुआ।
इंजीलवाद का प्रभाव भारत में तेजी से बढ़ा। शुरुआत में चर्च नृत्य को पाप मानता था। एवं विक्टोरियन शुद्धता मूवमेंट में भी नृत्य बुरा माना गया।
विक्टोरिया शुद्धता मूवमेंट यूरोप में 18 शताब्दी में ईसाई मत के आधार पर प्रचारित एक आंदोलन था। इसमें नृत्य को पाप की श्रेणी में रखा गया। एवं नृत्य करने वाली महिलाओं को वैश्या माना गया।
भारत में भी विक्टोरिया शुद्धता मूवमेंट लागू हुआ। और नृत्य को नाच और नृत्यांगना को नाच गर्ल कहा गया।
नाच विरोधी आंदोलन
नृत्य को नाच कहा गया और अंग्रेज़ो ने इन्हें नटखट लड़की कहा।
ईसाई नैतिक शुद्धता के लिए भारत में नाच विरोधी आंदोलन तेज किया गया
इसमें देवदासी को नाच गर्ल और वैश्या की उपाधि दे दी गई।
जबकि मंदिर देवदासी से पहले ही छिन लिए गए थे
नाच विरोधी आंदोलन के नाम पर देवदासी प्रथा के खिलाफ ग़लत जानकारी प्रचारित की गई और फिर अंगेजो ने देवदासी पर कानून भी बना दिया।
अंग्रेजी शासन के ग़लत नीतियों के कारण देवदासी गरीबी में ढाकेल दी गई।और उनका पतन हुआ।
यूरोप में नृत्य के प्रति डर
1518 की नृत्य महामारी जिसे डांस प्लेग भी कहा जाता है।
जुलाई 1518 से सितंबर 1518 तक पवित्र रोमन साम्राज्य में स्ट्रासबर्ग में हुआ था। कहीं 50 से 400 लोगों ने हफ्तों तक नृत्य किया और उनकी मृत्यु हो गई।
इस घटना के बाद यूरोप के समाज ने डांस को शैतानी मान लिया और डांस से डरने लगे
चर्च ने डांस के प्रकोप को रोकने के लिए प्रार्थना की। इस कारण यूरोप के लोग डांस से डरे हुए थे।
और इसलिए विक्टोरिया शुद्धता मूवमेंट में डांस को ग़लत माना। यह मूवमेंट ईसाई नैतिक सुधार आंदोलन था।



चर्च द्वारा कुंवारी लड़की की मसीह से शादी (consecrated virgin)
ईसाई चर्च में यूरोप में ये परंपरा रही कि कुंवारी लड़की की शादी मसीह से करा दी जाती थी। इस शादी के बाद लड़की सदैव चर्च की सेवा में लग जाती थी और विशप धार्मिक आदेशों का पालन करती है।
ऐसे ही नन भी ईसाई प्रचार कार्य में लगती है। पर consecrated virgin अलग होती है। ये मसीह से विवाहित होती है।


देवदासी जो रानी बनी
ऐसे भी कई उदाहरण मिलते हैं जब देवदासी ने विवाह किया। ऐसी भी देवदासी है जिनका विवाह राजा से हुआ और वो रानी बनी
इसलिए यह कहना ग़लत है कि देवदासी विवाह के लिए स्वतंत्र नहीं थी और निचली जाति की थी और उन्हें समाज में सम्मान नहीं था। यहां तो राजा देवदासी से विवाह कर रहा है।
1.महामहिम मल्हार राव नारायण राव पुआर
मल्हार राव नारायण राव पुआर ,देवास राज्य के राजा थे।उन्होंने इंदिरा सालगांवकर नाम की देवदासी से विवाह किया।शादी के बाद इंदिरा का नाममहामहिम प्रभावती राजे पुआर हो गया,वो महारानी बनी।
2.जादरमन सुंदर पांडियन
ये मदुरै के राजा थे इन्होंने सोक्काथंडाल से शादी की, जो की एक देवदासी थी और तिरुवनाइकोइल मंदिर में काम करती थी।
3.होयसल राजा
होयसल के राजा वल्लालर की पत्नी, बोम्मलादेवी देवदासी की बेटी थी।
4.सरबोजी(Saraboji)जो तंजौर के राजा थे।
सरबोजी अंग्रेजी स्कूल और सराय देवदासी मुक्तियम्बल को सम्मानित करने के लिए बनवाया।तंजौर के राजा ने देवदासी मुक्तियम्बल से प्रेम करते थे। अपनी पत्नी बनाया। पर प्रसव के दौरान देवदासी मुक्तियम्बल की मृत्यु हो गई।
देवदासी ने शास्त्रीय नृत्य भारतनाट्यम के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
देवदासी भरतनाट्यम, मोहिनीअट्टम, कुचिपुड़ी और ओडिसी जैसे शास्त्रीय भारतीय नृत्य भी सीखती और ये नृत्य करती थी। नृत्य मंडपम में नृत्य का प्रदर्शन किया जाता था।ये सभी नृत्य साधना और भक्ति से संबंधित है।ये देवता को समर्पित है।देवदासी ने इस नृत्य परंपरा को लगातार सीखकर और प्रदर्शन करके इन्हें जीवित रखा और प्रसारित किया।देवदासी ने संगीत और नृत्य के क्षेत्र में बहुत बड़ा योगदान दिया।
कुछ प्रतिष्ठित देवदासी घराने की प्रसिद्ध महिलाएं
•बैंगलोर नागराथनम्मा
• पद्म विभूषण नृत्यांगना बालासरस्वती
• वीणाई धनम्मल
• तंजावुर बृंदा और उनकी बहन तंजावुर मुक्ता
• एमएस सुब्बुलक्ष्मी
• मायलापुर गौरी अम्मल
• मुद्दपलानी
• शशिमणि देबी
• मुथुलक्ष्मी रेड्डी
• मूवलूर रामामिर्थम
• एम.एल. वसंतकुमारी
विश्व के अन्य प्रथा
1.बेबीलोन के लोग
बेबीलोन के लोग अपने पूजा स्थल पर कुंवारी लड़की रखते थे।ईशर (Ishtar)बेबीलोन की प्रसिद्ध देवी थी।ईशर(Ishtar)के मंदिर में कुंवारी लड़कीयो को नियुक्त किया जाता था। बेबीलोन इस प्रथा में वयस्क लड़कियों को ईशर (Ishtar)मंदिर में बैठने के लिए कहा जाता था। मंदिर में बैठी लड़की को जो चाँदी का सिक्का दे देता था, वह उसकी सम्पत्ति बन जाती थी तथा वह व्यक्ति उसके साथ अपना सम्बन्ध स्थापित कर लेता था।
2.पवित्र कुंवारी प्रथा(Consecrated virgin) यह प्रथा पूरे यूरोप में प्रचलित थी इसमें विरजिन कुंवारी लड़की की शादी मसीह से करा दी जाती थी।यह कैथोलिक ईसाई में आज भी प्रचलित है।
3.जापान
कामाकुरा काल के दौरान, कई तीर्थस्थल और मंदिर, जो मीको सेवा देती है। ये लड़कियां होती है जो धार्मिक कार्यों में जुड़ी होती है।उन्हें अरुकी मीको (शाब्दिक अर्थ चलती तीर्थ-युवती )के रूप में जाना जाने लगा। ये व्यापक रूप से वेश्यावृत्ति से भी जुड़े होती है।
5.फोनेशिया
पवित्र वेश्यावृत्ति,प्राचीन फोनीशियन का रिवाज था ।यह अपने आराध्य एस्टेर्ट और एडोनिस के मंदिर में वैश्या वृत्ति करते थे। इसे अपने आराध्य को समर्पित करते थे।
6.ग्रीक
ग्रीक रिवाज में एफ़्रोडाइट का मंदिर संपादन करना कोरिंथ शहर में एफ़्रोडाइट देवी के मंदिरों के भीतर पवित्र वेश्यावृत्ति का कार्य प्रसिद्ध और व्यापक था।इसमें एक हज़ार मंदिर-दासियाँ, वेश्याएँ थीं।
7.रोम
पुएलाए गैडिटाने (Puellae gaditanae) वे लड़कियां थी जो नृत्य करती थी । इनके नृत्य अश्लील होते थे। ये वैश्या वृत्ति में शामिल थी।ये रोम देवी वीनस के मंदिर से संबंधित थी, इन नर्तकी को रोम में जूनो, वीनस मंदिर में नियुक्त किया जाता था।

उपसंहार
1.6 वी शताब्दी मे केशरी राजवंश महारानी ने मंदिरों में देवताओं को सम्मानित करने के लिए, कुछ महिलाओं को, जो शास्त्रीय नृत्य से प्रशिक्षित उन्हें मंदिर में कार्य के लिए नियुक्त किया गया।
2.प्रारंभ में देवदासी एक सम्मानित पद था जो कला एवं मंदिर अनुष्ठान से संबंधित था।
3.छठी से 13वीं शताब्दी के बीच की अवधि के दौरान राजाओं का संरक्षक देवदासीयो को मिला। देवदासी संपन्न थी। समाजिक स्थिति बहुत अच्छी थी। देवदासी भूमि, संपत्ति और आभूषण के उपहार में देती थी।विदेशी आक्रमणकारी के आने के बाद मंदिर पर हमला हुआ और देवदासी की स्थिति ख़राब हो गई।
4.मुगल एवं ब्रिटिश शासन ने देवदासी की समाजिक स्थिति बहुत नीचे गिरा दी।
5.ब्रिटिशर ने नृत्य को ईसाई मान्यताओं के अनुसार देखा उन्हें बुरा माना और नृत्य करने वाली महिलाओं को वैश्या कहा और फिर देवदासी को बदनाम किया। विक्टोरिया मूवमेंट को भारत में लागू करने के लिए नाच विरोधी आंदोलन शुरू हुआ।
6. चौदहवीं शताब्दी के बाद देवदासी की स्थिति ख़राब होने लगी और 16 शताब्दी से देवदासी की समाजिक स्थिति तेजी से ख़राब होते गई।
हमने दोनों स्ट्रीम करके इस विषय पर स्पष्टता से सब बताने की कोशिश की है।
7. शिलालेख शास्त्र के प्रमाण और विदेशी यात्रियों के प्रमाण दिखाए। सब ये ही स्पष्ट करती है कि देवदासी एक सम्मानित पद था और समाजिक स्थिति अच्छी थी। देवदासी का पतन विदेशी आक्रमणकारी के कारण हुआ।



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