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पर्यावरण आतंकवादी एनजीओ भारत में पटाखा उद्योग की हत्या कर रहे हैं।

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पटाखे छोड़ने में दुनिया के बाक़ी देशों के लोगों के मुक़ाबले आपकी औक़ात यानी हैसियत क्या है?

पाँच-दस हज़ार के पटाखे फोड़कर यहां लोगों को लगता है कि उन्होंने कमाल कर दिया। उनको पता नहीं कि उनसे सैकड़ों गुना ज्यादा पटाखे विदेश में फोड़े जाते हैं। आइए कभी। अमेरिका में देखिए। यूरोप और ऑस्ट्रेलिया के फ़ेस्टिवल देखिए।

पटाखों को लेकर भारत में फ़ालतू का अपराध-बोध फैलाया जा रहा है।

पर्यावरण आतंकवादी एनजीओ भारत में पटाखा उद्योग की हत्या कर रहे हैं। उत्सव की भावना को ख़त्म कर रहे हैं। वे संस्कृति विरोधी हैं।

सच ये है कि अभी हमारी औक़ात नहीं बन पाई है पर्यावरण ख़राब करने की।

सच ये है कि भारतीय पटाखा उद्योग सीधे तौर पर आठ लाख लोगों को साल भर पर्मानेंट नौकरी देता है। बेचने में बीसियों लाख और परिवार जुड़े हैं।

ये एक ऐसा भारतीय उद्योग है जो लगभग पूरी तरह तमिलनाडु के ओबीसी नाडार जाति के हाथ में है।

भारत में पटाखा उद्योग के संस्थापक अय्या नाडार और षण्मुगा नाडार थे जो अंग्रेजों के समय माचिस फ़ैक्ट्री चलाते थे। उन्होंने शिवकाशी से काम शुरू किया।

और हां, दुनिया के सिर्फ 2% पटाखे भारत में बनते हैं। वैश्विक प्रदूषण में हम कहीं से ज़िम्मेदार नहीं हैं।

लेकिन भारत में पटाखे बनाने, बेचने और फोड़ने वाले विलेन बना दिए गए हैं।

किसी यूरोपीय देश या अमेरिका या ऑस्ट्रेलिया में पटाखा बैन नहीं है।

सिडनी में नए साल पर जब पटाखे फोड़े जाते हैं तो देखने के लिए शहर में दस लाख लोगों का मजमा जुटता है। टीवी पर इसे सारी दुनिया देखती है।

पर्यावरण आतंकवादियों ने भारत के पटाखा उद्योग का गला घोट दिया है। अब उनके निशाने पर पटाखा फोड़ने वाले हैं। उनके साथ इन दिनों, वामपंथी, मज़हबी कट्टरपंथी और कुछ अति जागरूक लोग भी जुड़ गए हैं।

इन्होंने माहौल बना रखा है कि भारतीय कितने मूर्ख हैं। सबसे ज़्यादा पटाखा फोड़ते हैं।

सिडनी में पटाखों से नए साल का जश्न

नहीं महाराज। पटाखे बनाने और फोड़ने वाले टॉप देशों में हम कहीं नहीं हैं। दुनिया में पटाखे बनाने वाले पाँच प्रमुख देश हैं चीन, नीदरलैंड, जर्मनी, स्पेन पोलैंड। सबसे ज़्यादा पटाखे अमेरिका ख़रीदता है।

न पटाखा बनाने वाले प्रमुख देशों को पर्यावरण की चिंता है न ख़रीदने वाले को। सब मौज कर रहे हैं।

भारत में ही लोग दुबले हुए जा रहे हैं।

भारत में एनजीओ लॉबी ने ऐसा आतंक मचा दिया कि साल में एक दिन पटाखे जलाने के कारण ही लोगों को स्वास्थ्य समस्या हो गई है। ये एनजीओ विदेश पोषित हैं।

वैसे आपको ये भी जानना चाहिए कि भारत में पटाखा बनाने वाले सबसे बड़े बिज़नेसमैन ओबीसी नाडार जाति के हैं। कालीश्वरी और स्टैंडर्ड पटाखा फ़ैक्ट्री सबके मालिक नाडार ही हैं।

ये जाति परंपरा से ताड़ी उतारने का काम करती है।

पटाखा फ़ैक्ट्रियां साल भर चलती हैं और उनमें आठ लाख से ज़्यादा स्थायी मज़दूर हैं।

भारत के बने पटाखे अमेरिका, बुल्गारिया, पोलैंड, तुर्की आदि देशों में भी बिकते हैं।

प्रो. दिलीप मंडल

पत्रकार


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