टीपू सुल्तान को विज्ञान और प्रौद्योगिकी के ज्ञाता के रूप में प्रस्तुत करने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला एक प्रमुख दावा यह है कि टीपू सुल्तान राकेट के अविष्कारक थे।कछ लोग मिसाइल मैन तक कहते हैं। परन्तु प्राथमिक इतिहासिक साक्ष्य यहे सिद्ध नहीं करते।
जेम्स फोर्ब्स
जेम्स फोर्ब्स कि पुस्तक, ओरिएंटल मेमोयर्सः ए नैरेटिव ऑफ सेवेंटीन इयर्स रेजिडेंस इन इंडिया, खंड1 पेज नंबर 359,360 में लिखते हैं:
“मराठों द्वारा इस्तेमाल किया जाने वाला युद्ध रॉकेट, जिससे हमें अक्सर परेशानी होती थी, आठ या दस इंच लंबी और लगभग दो इंच व्यास वाली लोहे की नली से बना होता है। यह विनाशकारी हथियार कभी लोहे की छड़ से, कभी दोधारी तलवार से जुड़ा होता है, लेकिन आमतौर पर चार या पांच फीट लंबे मजबूत बांस के डंडे से जुड़ा होता है, जिसमें लोहे की एक कील नली से छड़ या डंडे तक निकली होती है, और नली ज्वलनशील पदार्थों से भरी होती है।”
यह यहां सिद्ध होता है कि युद्ध में मराठा राकेट का प्रयोग करते थे। फिर टीपू को राकेट का अविष्कारक कैसे कह सकते हैं?
यहां ध्यान देने वाली बात है कि जेम्स फोर्ब्स भारत में 1765 से 1784 तक रहे एवं इस बीच के घटनाओं का विवरण लिखा।जेम्स फोर्ब्स ने मराठा सैन्य शिविर का भ्रमण भी किया था एवं इसका विवरण भी लिखा था।इससे यह स्पष्ट होता है कि जेम्स फोर्ब्स का विवरण समकालीन है और इस वजह से यह सबसे प्रमाणिक साक्ष्य है।
विलियम कॉग्रेव
कछ लोगों का मानना है कि आधुनिक युद्ध रॉकेट विकसित करने वाले विलियम काँग्रेव ने टीपू के खिलाफ लड़ाई के दौरान पहली बार इस हथियार को देखा था। और इससे प्रेरणा लेकर आधुनिक राकेट बनाया। इस मान्यता का समर्थन करने वाला कोई प्रमाण नहीं है। वास्तव में, इस बात का कोई प्रमाण नहीं है कि कॉग्रेव कभी भारत आए थे। कॉग्रेव ने स्वयं युद्ध रॉकेट में अपनी रुचि का श्रेय टीपू को कभी नहीं दिया। इस बात का कोई प्रमाण नहीं है कि टीपू के रॉकेटों ने कॉन्ग्रेव को अपने रॉकेट विकसित करने का विचार दिया।
(reference-Page 85, Tipu as He Really Was Gajanan Bhaskar Mehendale)
12th Century का मंदिर
भारत के कर्नाटक राज्य के हलेबीडू में स्थित होयसलेश्वर मंदिर का ये शिल्प देखें। इसमें राकेट जैसी संरचना देखी जा सकती है। एवं प्राचीन भारतीय ग्रंथों में भी आग्नेय शस्त्र का उल्लेख मिलता है। अतः भारतीय ऐसे अग्नि शस्त्र से परिचित थे।

निष्कर्ष
प्रमाण ये ही बताते हैं कि टीपू राकेट के अविष्कारक नहीं थें।



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