नीदरलैंड से ताम्रपत्र भारत आते ही भारत में बैठे प्रोपोगेंडा गैंग,चोल राजाओं को बौद्ध बताने लग गई ।
इन प्रोपोगेंडा गैंग का कहना है कि नीदरलैंड से भारत आए इन ताम्रपत्रो में चोल राजा द्वारा बौद्ध विहार को दान देने का उल्लेख है। इसलिए चोल बौद्ध हो गए।सबाल यह उठता है कि कोई ऐसा तर्क कैसे दे सकता है? मतलब अगर कोई किसी धार्मिक स्थल को दान दें दे तो वह उसी धर्म का मानने वाला कैसे हो जाएगा?
आज भी सरकार में बैठे शासक विभिन्न धार्मिक स्थल में जाते है और दान भी करते हैं, ये धार्मिक सहिष्णुता को दर्शाती है। चोल राजाओं ने भी हिंदू होते हुए भी बौद्ध स्थल को दान दिया, इससे चोल राजाओं कि उदारता और सहिष्णुता प्रकट होती है।
अब आते हैं फैक्ट पर , नीदरलैंड के उसी ताम्रपत्र, जिसे लिडेन तामपत्र भी कहते हैं, उसमें चोल राजाओ की वंशावली लिखी है। ये ताम्रपत्र पहले ही पढ़ लिए गए थे और epigraphia indica volume 22 वर्ष 1938 में प्रकाशित हुए थे।
लिडेन ताम्रपत्र का आरम्भ भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की स्तुति से होता है। अर्थात् जो यह कहते हैं कि चोला राजा शैव थे और वैष्णव मत या भगवान विष्णु को नहीं मानते थे, उनका प्रोपोगेंडा यहीं खत्म हो जाता है क्योंकि इस लेख की शुरुआत भगवान विष्णु की स्तुति से शुरू होती है।
इस तामपत्र के दूसरे श्लोक में भगवान शिव व पार्वती जी की स्तुति के साथ – भगवान विष्णु की भी स्तुति है। इसमें भगवान विष्णु को योगनिद्रा में बताया है।
इस लिडेन ताम्रपत्र के श्लोक 3 से 30 तक चोल राजाओ की वंशावली बताई गई है।
वंशावली की शुरुआत महर्षि मनु से होती है। अर्थात् चौला राजा खुद को मनु का वंशज मानते थे? क्या अब मनु भी बौद्ध हो जायेगें। फिर इतने वर्षों से वामपंथ मनु को गालियां क्यों दे रहा थे ?
मनु के बाद इक्ष्वाकु, मांधाता, मुलचंद, शिबि आदि सूर्यवंशी राजाओं का उल्लेख है, जिन्हें चोलवंश के पूर्वज बताया है। असल में चोला खुद को सूर्यवंशी मानते थे।
ताम्रपत्र के 37 वें श्लोक में पृथ्वी को शेषनाग ने धारण किया है, ऐसा लिखा है।
क्या बौद्ध मानते हैं कि पृथ्वी शेषनाग के फन पर है?
श्लोक 12 में चोल राजाओं की शिव भक्ति का काव्यात्मक वर्णन है। यहां चोल राजाओं को शंभु (शिव) के चरण-कमलों पर मंडराने वाले भौंरे के समान भक्त कहा गया।
इसके अतिरिक्त चोल राजाओ की वंशावली 961 CE की अनबिल तामपत्र, कन्याकुमारी शिलालेख 1070 CE तिरुवालंगाडु ताम्रपत्र 1018 CE में मिलती है। अनबिल तामपत्र में चोल राजाओ को भगवान विष्णु का वंशज बताया गया है जबकि कन्याकुमारी एवं तिरुवालंगाडु अभिलेख में चोल राजाओं को मनु का वंशज बताया गया है। अतः सभी पुरातत्विक साक्ष्य यह सिद्ध करते हैं कि चोल हिंदू थे।
चोल राजाओं की वंशावली

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