धर्मविरोधी लोग ये प्रचार करते हैं कि देवी दुर्गा ने छल से महिषासुर को मारा था। देवी ने शेष बदल कर महिषासुर का वध किया था। हमने अपनी पिछली स्ट्रीमों में यह स्पष्ट कर दिया था कि महिषासुर का वध देवी ने वीरतापूर्वक आमने सामने के युद्ध में किया था। किंतु इसमें भी एक रहस्य है। वो रहस्य साहित्यों से तो नहीं किंतु प्रतिमाओं के अवलोकन के दौरान हमें पता चला।
वो रहस्य यह है कि छल करने वाला कोई और नहीं बल्कि महिषासुर ही था। यह छली व्यक्ति एक भैंसें के खोल या खाल में छिपकर लोगों को डराया, धमकाया और लूटा करता था। भैंसें के खोल की आड़ में महिलाओं और जनता पर अत्याचार करता था। अपनी सेना और महिष की आड़ में छिपकर ये खुद को हर बार बचा लेता था। किन्तु जब इसका सामना साक्षात् आदिशक्ति देवी से होता है तो इसकी चालबाजी काम नहीं आती है और जब देवी द्वारा इसके भैंसें का सिर और खाल उतार दिया जाता है तो यह धूर्त उस भैंसें के खोल से निकलकर अपने असली रुप में आता है। तब देवी इस छली धूर्त और खाल के पीछे छिपने वाले असुर का वध करती है।
आइये हम प्रतिमाओं में देखते हैं-

















इस प्रकार हमने इन प्रतिमाओं में देखा कि असल में धोखेबाज, छलिया और धूर्त महिषासुर ही था जो कि भैसें के खोल में छिपकर लोगों को डरा धमकाकर मारा और लूटा करता था। महिलाओं पर अत्याचार किया करता था। भैंसें के खोल में छिपकर खुद को बचाते हुए इसने ऋषियों, देवों, महिलाओं और आम जन सभी को परेशान और लूट लिया था। यह छल के सहारे लोगों पर अत्याचार कर रहा था। लेकिन जब देवी से इसका आमने सामने का सामना हुआ तो देवी ने इसका न केवल वध किया अपितु इसका रहस्य भी सामने ला दिया कि यह असल में भैसां रुपी असुर नहीं बल्कि भैंसें के खोल या खाल में छिपा हुआ धूर्त असुर था। इस प्रकार भैंसें की ओलाद और उसी मरे भैंसें की खाल में छिपा बैठा महिषासुर का भेद देवी ने खोला और इस अत्याचारी धूर्त का वध करके इसके रहस्य से देवी ने पर्दा उठाया और इस धूर्त के अत्याचारों से देवी ने मुक्ति प्रदान की। इस प्रकार मुर्ति कला से वो रहस्य उठा जो अब तक रहस्य था।



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