इतिहास चोरों की मक्कारी ….
आज कल आप इतिहास चोरों को यह कहते हुवे सुनते होंगे कि भारत में बौद्ध युग में ब्राह्मण नहीं थे ? वैदिक संस्कृति और वैदिक शिक्षा व्यवस्था ही नहीं थी। लेकिन सच ठीक इसके विपरीत हैं। यहां देखें –

“बुद्धपञ्घपञ्घ” “बुद्ध के प्रश्न।” यह ग्रंथ बौद्ध धर्मग्रंथों के संग्रह महासंगीति तिपिटक का हिस्सा है।यहां आप साफ देख सकते हैं ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद सहित विभिन्न वेदों के साथ-साथ इतिहास, व्याकरण और ज्योतिष जैसे अन्य विषयों पर चर्चा की गई है।
अनुवाद में देखे ….
“जैसे, हे महाराज, ब्राह्मण लड़के ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद पढ़ते हैं। वे लक्षण-शास्त्र, इतिहास, पुराण, निघण्टु (शब्दकोश), केतु-विद्या, अक्षर-भेद, पद-ज्ञान, व्याकरण, विभिन्न बोलियों का अध्ययन, स्वप्न-लक्षण, निमित्त-शास्त्र, छः ग्रह, चंद्र-ग्रहण, सूर्य-ग्रहण, शुक्राचार का चरित्र, उत्सर्ग और उठान-विद्या, देवदूतों के अशुभ-लक्षण, ओकंति-विद्या, ऊंचाई-पतन के भौतिक-नियम, दिशाओं का ज्ञान, पृथ्वी के नाप-तौल, ज्योतिष, लोकायत (दार्शनिक तर्क), सांख्य-शास्त्र, मृग-चक्र (शिकार-ज्ञान), अंतर-चक्र, मांस-कुशला (मांस-बाने की कला), उत्तम औषधियां, तीर-कमान चलाने की कला, विभिन्न पशुओं की चिकित्सा, खेती-किसानी, वाणिज्य, गाय-भैंस आदि पशुओं की देखभाल— इन सबका अध्ययन किया करते हैं।”
बुद्धकाल में ब्राह्मण नहीं थे वेद नहीं थे … यह वही कह सकता है जिसने ना बुद्ध को पढ़ा है ना बौद्ध ग्रंथों का …जिनका इतिहास चोरी और धूर्तता मक्कारी पर टिका होता है वहीं मक्कार और गिरे हुवे लोग बिना प्रमाण के कुछ भी बकैती करते रहते है। जबकि प्रमाण यहां मूल पाली साहित्य के पाली संस्करण से प्रस्तुत है देख सकते हैं सच क्या हैं ?
• ब्राह्मण वेद ही नहीं बल्कि
• दर्शन
• भाषा
• ज्योतिष
• चिकित्सा
• खगोल
• कृषि
• पशुपालन
• व्यापार
• युद्ध-कला
• औषधि-ज्ञान
सभी विद्या पढ़ते थे।
और बुद्ध के समय यह सब अध्ययन और अध्ययन का विषय थे !
Not —
जानकारी अच्छी लगी तो शेयर करना बिल्कुल ना भूले .. अगर आप अपना पक्ष नहीं रखेंगे तो इतिहास चोरों की औलादें आप की संस्कृति को बर्बाद करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ने वाले।

