दावा
शहीद ए आजम भगतसिंह को फांसी दिलवाने के लिए ब्रिटिश सरकार की तरफ से लड़ने वाले वकील का नाम सूर्य नारायण शर्मा था जो कि एक मनुवादी था।

फैक्ट
भगत सिंह पर दो मुकदमा दर्ज हुआ था।पहला केन्द्रीय असेम्बली बम ब्लास्ट का मामला दूसरा सांडर्स हत्या (जिसे लाहौर षड्यंत्र केस भी कहते है)का मामला था। भगत सिंह को फांसी सांडर्स वाले मुकदमे में हुई थी।
The Trial of Bhagat Singh’ पुस्तक में
एसेंबली बम ब्लास्ट के ट्रायल का जिक्र है। इस पुस्तक के मुताबिक, ‘इस मामले में ट्रायल की शुरुआत 7 मई 1929 को हुई, जिसमें ब्रिटिश सरकार की तरफ से राय बहादुर सूर्यनारायण ने सरकार का पक्ष रखा परंतु इस मामले में भगत सिंह को फांसी की सजा नहीं दी गई थी।
भगत सिंह को फांसी सांडर्स मामले में हुई थी इसलिए अब हम यहां सांडर्स मामले से जुड़ा तथ्य बता रहे हैं।
सांडर्स मामले से संबंधित साक्ष्य भारत सरकार के डिजिटल दस्तावेज़ इंडियन कल्चर पोर्टल पर उपलब्ध हैं।सॉन्डर्स हत्या मामले में आधिकारिक दस्तावेजों से स्पष्ट है कि भगत सिंह की तरफ से लाला दुनी चंद केस लड़ रहे थे जबकि Mr C.H.Carden-Noad ब्रिटिश सरकार की तरफ से केस लड़ रहे थे। सांडर्स मामले में सूर्य नारायण शर्मा नाम के किसी भी व्यक्ति का कोई जिक्र नहीं है।

निष्कर्ष – अतः किया गया दावा झूठा है।



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