वामपंथी और वामपंथी इतिहासकार यह बता रहे हैं कि पेठा भारत में मुगल लेकर आए। मुगलों के पहले भारत में पेठा कोई नहीं जानता था। वामपंथी इतिहासकार मिठाई, संगीत, कला, साडी चपाती बनाने की कला, कुल्फी, गुलकंद, गुलाब जामुन, जलेबी, पुलाव, फालुदा, बर्फी, बीरंज, मुरब्बो, हल्वो, शिरो और शक्कर पारा लेकर आए थे। इन सबका श्रेय मुगलों को देते आए हैं। आज हम यह जानेंगे कि क्या वाकई में पेठा मुगलों की लाई हुई मिठाई है ?
भारत में मुगलों द्वारा पेठा लाने की कहानी में भी एक रूपता नहीं है। तीन तरह की कहानीयां मिलती है।
पहली कहानी पहली कथा यह है कि ताजमहल के निर्माण में लगभग 21,000 श्रमिक लगे हुए थे, जो प्रतिदिन केवल दाल और रोटी खाते थे। रोजाना दाल-रोटी खाकर मजूदर भी ऊब चुके थे। तब मुगल बादशाह शाहजहां ने भीषण गर्मी में मजदूरों को तुरंत एनर्जी देने के लिए ताजमहल के मुख्य वास्तुकार मास्टर आर्किटेक्ट उस्ताद ईसा से चिन्ता जाहिर की। उस्ताद ईसा ने पीर नक्शबंदी साहब को अपनी समस्या बताई और जल्द ही कोई समाधान ढूंढने का अनुरोध किया। कहा जाता है कि एक दिन इबादत के दौरान पीर साहब बेहोश हो गए और उन्हें पेठा बनाने की विधि का सुझाव आया था। इसके बाद तकरीबन 500 मुगल रसोईयों ने मजदूरों के पेठा बनाया था।
दूसरी कहानी यह है कि मुगल बादशाह शाहजहां ने अपनी प्रिय बेगम मुमताज महल की याद में आगरा में संगमरमर निर्मित भव्य ताजमहल का निर्माण करवाया। बादशाह शाहजहां को ताजमहल से झलकने वाली पवित्रता और शांति ने इस हद तक आकर्षित किया कि उन्होंने अपने शाही रसोईयों से ताजमहल की तरह ही सफेद, चमकदार और शुद्ध मिठाई बनाने की चुनौती पेश कर दी। फिर क्या था, शाही रेसाईयों ने सफेद कद्दू को टुकड़े में काटा और धीमी कोयले की आग में गुलाब के स्वाद वाली चाशनी में उबाला। इस तरह से आगरा का प्रसिद्ध पेठा बनकर तैयार हुआ।
तीसरी कहानी के मुताबिक स्वयं मुमताज ने अपने हाथों से पेठा बनाकर मुगल बादशाह शाहजहां को खिलाया था। इसके बाद शाहजहां को यह व्यंजन इतना पसंद आया कि उन्होंने अपनी शाही रसोई में पेठा बनाने का ऐलान कर दिया। फिर क्या था, शाहजहां की शाही रसोई में कार्यरत तकरीबन 500 कारीगरों के जरिए पेठा बनना शुरू हो गया।
प्रसिद्ध शिक्षाविद, समीक्षक और इतिहासकार पुष्पेश पंत कहते है कि “पेठा गरीब आदमी की मिठाई है और उसका कोई शाही संबंध नहीं है। इसमें दूध या मावा नहीं होता है। यह लौकी (Ash Gourd) और बहुत सारी चीनी के साथ बनाया जाता है, जो कि शाही व्यंजन का संकेत नहीं है।”
उन्होंने यह भी कहा कि पेठा झारखंड, बिहार, छत्तीसगढ़ और उत्तराखंड सहित आगरा से जोड़े जाने में मिलता है।भारत के कुछ हिस्सों के लोग फलों के ओला कहते हैं और ओला का मुरब्बा नामक कुछ तैयार करते हैं।
वे कहते हैं, मुरब्बा का मतलब है एक संरक्षण। उन्होंने इसे चीनी सिरप में डुबोया और इसे महीनों तक संरक्षित रखा और इसलिए इसे ओला का मुरब्बा कहा।आगरा वह स्थान था जहाँ लोग दूर-दूर की यात्रा के दौरान या रेलगाड़ियों को बदलते समय भोजन प्राप्त कर सकते थे। आज की तुलना में ट्रेनें धीमी और लंबी थीं। लोग पूड़ी और सूखी आलू की सब्जी खाते थे। पेठा बच्चों को खुश रखने और ऊर्जा के स्तर को उच्च रखने के लिए एक सर्वोत्कृष्ट नाश्ता बन गया। चूँकि इसमें खोआ नहीं होता, इसलिए इसे मथुरा के पेड़ा से ज्यादा पसंद किया जाता था। यह यात्रियों के लिए एक उपहार देने वाला विकल्प भी था।
मुगल बादशाह शाहजहां के काल के लिखी गई महत्वपूर्ण फारसी पुस्तक ‘नुस्खा-ए-शाहजहानी’ में मुगल व्यंजनों और शाही रसोई से जुड़े रहस्यों को उजागर किया गया है। ऐसे में इस महत्वपूर्ण ऐतिहासिक ग्रन्थ में भी पेठे का कहीं भी जिक्र नहीं किया गया है, जो इस बात का संकेत है कि मुगल रसोई से पूर्व भी पेठा अपने अस्तितत्व में था। एक तर्क यह भी है कि मुगल दूध और मावा से भरपूर मिठाइयों को बनाना और खाना पसंद करते थे जबकि पेठे को बनाने में कद्द व लौकी का इस्तेमाल किया जाता है।
पेठा का भारत में प्राचीन समय से औषधि के रूप में उपयोग
औषधीय गुणों से भरपूर होने के कारण इसे संस्कृत शब्द ‘कुष्मांड’ के नाम से अनेक चिकित्सीय विधियों में प्रयोग किया जाता है।कुष्मांडा से संबंधित संदर्भ चरक संहिता, सुश्रुत संहिता, अष्टांग हृदय, योगरत्नाकर आदि शास्त्रीय ग्रंथों में मिलता है।यहां हम कुष्मांडा (पेठा) बनाने की विधि को एक तालिका में अंकित कर रहे हैं जो कि आयुर्वेद में औषधि के रूप में उपयोग होता है।

• संदर्भ – Exploring potential of Kushmanda Avaleha in respiratory illness – A comprehensive review sheetal Sharma, Shreshtha Kaushik, Pramod Yadav, Galib Ruknuddin, Pradeep K. Prajapati(http://www.bldeujournalhs.in on Tuesday, July 19, 2022)
कुष्मांडा की औषधि का विवरण महर्षि वाग्भट के ग्रंथ अष्टांगहृदय में भी मिलता है। अतः कुष्मांडा (पेठा) भारतीय संस्कृति में बहुत प्राचीन रूप से उपयोग हो रही है।

भाव प्रकाश संहिता में भी कुष्मांडा (पेठा) का उपयोग औषधि के रूप में किया गया है।

उपसंहार
पेठा का प्रयोग प्राचीन समय से भारत में औषधि के रूप में किया जाता था। पेठा का उल्लेख आयुर्वेदिक ग्रंथों में मिलता है जो मुगल समय से प्राचीन है। अतः उपरोक्त तथ्यों से सिद्ध होता है कि यह कहना ग़लत है कि भारत में पेठा मुगल लेकर आए।



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