फातिमा और वामपंथी प्रोपोगेंडा
वामपंथीयो ने नांगेली की तरह एक नैरेटिव फातिमा शेख नाम के पात्र का गढ़ा है।वामपंथीयो ने यह बात फैलाई कि मुस्लिम समुदाय से आने वाली फातिमा शेख कन्या शिक्षा के लिए कार्य किया।और इन्हें पहली शिक्षिका तक कहते हैं।साथ ही माता सावित्रीबाई फुले जी के साथ फातिमा शेख का नाम भी जोड़ते हैं और यह कहते हैं कि इन्होंने पहला स्कूल खोला,और कन्या शिक्षा के लिए काम किया जिसका विरोध ब्राम्हणो ने किया।
आज हम जानेंगे कि क्या फातिमा शेख नाम की पात्र सच में कभी थी या महज एक काल्पनिक पात्र है नांगेली की तरह।
दिलीप मंडल का ट्वीट
9 जनवरी 2025 को दिलीप मंडल ने ट्वीट किया और फातिमा शेख को काल्पनिक बताया।ट्वीट पर क्या कहा वो हम बता रहे हैं।
दिलीप मंडल ने अपने एक्स पर कन्फेशन डालते हुए लिखा, “मैंने एक मनगढ़ंत कैरेक्टर बनाया था- फातिमा शेख। कृपया मुझे माँफ करें। सच्चाई तो ये है कि कोई फातिमा शेख कभी थी ही नहीं, वो कोई ऐतिहासिक हस्ती नहीं हैं। वो मेरी गलती थी कि अपने जीवन के एक निश्चित काल में मैंने इस नाम को अचानक गढ़ा। मैंने ये सब जानबूझकर ही किया था।”
दिलीप मंडल आगे कहते हैं की गूगल में इससे पहले कोई एंट्री नहीं पाएंगे ।न कोई किताब मिलेगी और न ही कहीं भी कोई जिक्र होगा।
मंडल के अनुसार, “फातिमा शेख उन्हीं की वज्रह से सोशल मीडिया के नैरेटिव में आईं और गायब भी हो गई। वह अपने कन्फेशन में कहते हैं कि अब उनसे कोई सवाल न करे कि आखिर उन्होंने ऐसा किया क्यों था। ये समय और हालात वाली बात है। किसी कारणवश एक हस्ती को गढ़ना पड़ा था इसलिए उन्होंने वो किया। हजारों लोग इसकी गवाही दे सकते हैं।जिनमें से कइयों ने तो पहली बार मुझसे ही ये नाम सुना।”
उन्होंने लिखा कि वह नैरेटिव गढ़ना, छवि वे निर्माण करना जानते हैं। इसलिए उनके लिए ये हैं सब करना मुश्किल नहीं था।फातिमा शेख की कोई तस्वीर भी नहीं है और जो है वो सब काल्पनिक है।
फातिमा शेख के अस्तित्व में आने के बाद जिन लोगों को राजनीतिक और वैचारिक उद्देश्यों के लिए इस कहानी की ज़रूरत थी, उन्होंने इसे फैलाया और इस प्रकार यह नाम अस्तित्व में आया।
मंडल कहते हैं, “ज्योतिबा फुले और सावित्रीबाई फूले का पूरा लेखन प्रकाशित हो चुका है, और उसमें फातिमा शेख का का नाम नहीं है। यहा तक कि बाबा साहेब अबेडकर ने भी कभी फातिमा शेख का जिक्र नहीं किया”
दिलीप मंडल का ट्वीट देखें

दिलीप मंडल ने ट्वीट के साथ गूगल सर्च का एक ग्राफ डाटा भी जोड़ा

फातिमा शेख पर विकिपीडिया
दिलीप मंडल द्वारा एक्स पर खुलासे किए जाने के बाद, एक विकिपीडिया संपादक ने पेज पर प्रस्तावित विलोपन (PROD) टैग जोड़ा, साथ ही इस बात पर एक लंबा स्पष्टीकरण भी दिया कि पेज को क्यों हटाया जाना चाहिए।पर विकिपीडिया ने अब तक पेज नहीं हटाया।विकिपीडिया में फातिमा शेख से संबंधित जो जानकारी और चित्र है, उसका कोई भी मूल संदर्भ विकिपीडिया पेज में मौजूद नहीं है। अगर आप संदर्भ सूची में जाएंगे तो कुछ न्यूज पोर्टल कि लिंक है। विकिपीडिया पेज में कोई भी समकालीन प्रमाण नहीं दिए हैं।

फातिमा शेख के दावे पर समर्थकों के तर्क
फातिमा शेख के वास्तविक होने के लिए जिन तथ्य और सोर्स का सहारा लिया जा रहा है वे नवीन है और उनमें कोई भी समकालीन प्रमाण नहीं।फिर भी एक चित्र और पत्र को सहारा बनाया जाता है और दावा किया जाता है कि फातिमा शेख काल्पनिक नहीं है।
जबकि उस चित्र और पत्र से यह बिल्कुल साबित नहीं होता कि फातिमा शेख नाम की कोई महिला थी जो पहली शिक्षिका थी।

दिलीप मंडल का रिप्लाई

हरि नरके जी का 2022 का ट्वीट
जब डूडल द्वारा फातिमा शेख की जयंती बनाई गई तब भी हरि नरके जी ने सबाल उठाए थे।और कहा था कि ये जयंती किस दस्तावेज के आधार पर मनाई जा रही है। हरि नरके जी विद्वान हैं वें बाबा साहेब डॉ अम्बेडकर सम्पूर्ण वाड्मय के संपादक रह चुके हैं। हम उनके मराठी ट्वीट और उसका गूगल लैस से किया गया अनुवाद दिखा रहे हैं।

उपसंहार
फातिमा शेख का कोई भी समकालीन प्रमाण नहीं मिलता। बाबा साहेब डॉ अम्बेडकर सम्पूर्ण वाड्मय और ज्योतिबाफुले, माता सावित्रीबाई फुले समग्र वाडमय में भी कोई सबूत नहीं मिलता।दिलीप मंडल ने कबूल किया है कि ये पात्र उन्होंने खुद गढ़ा है।विकिपीडिया ने पेज बनाया ,पर उनके जन्मदिन आरंभिक जीवन संलग्न फोटो का कोई समकालीन प्रमाण नहीं दिया।डूडल ने भी श्री हरि नरके जी द्वारा ट्वीट के माध्यम से उठाए गए सवाल का जबाब नहीं दिया। अतः स्पष्ट होता है कि फातिमा शेख पात्र एक गढ़ा गया पात्र है।वामपंथीयो ने दलित मुस्लिम वोट बैंक बनाने के लिए इसका प्रचार किया और माता सावित्रीबाई फुले जी के साथ जोड़ दिया।



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