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बौद्धों का तंत्र मंत्र प्रयोग

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बौद्ध मत की एक शाखा है, वज्रयान। इसी वज्रयान में विभिन्न देवी देवताओं की पूजा और मुर्तियां तथा तंत्र मंत्र होते हैं। इनके अनेकों ग्रंथ हैं, जिनमें बहुत सारे चमत्कारिक तंत्र मंत्र प्रयोग हैं। इन्हीं ग्रंथों में से एक है- “श्री चण्ड महारोषण तंत्र” इस ग्रंथ में ऐसे अद्भुत मंत्र प्रयोग हैं कि उनके सहारे बौद्धों ने वाद प्रतियोगिता से लेकर शत्रुओं तक को जीत और वश में करने की क्षमता रखते थे,और बौद्धों की इस चमत्कारिक शक्ति का ब्राह्मणों के पास कोई जवाब नहीं था।

हां वो बात अलग है कि इस्लामिक आक्रमण के समय में शक्ति काम नहीं आयी। बौद्धों के पास तंत्र मंत्र की कौन कौन सी सिद्धि थी और वो कैसे आयी,इसी का वर्णन हम श्री चंड महारोषण तंत्र के आलोक में समझते हैं।

यहां इस ग्रंथ की प्राचीनता और प्रमाणिकता की बात करें तो,नेपाल में इस ग्रंथ की  सौ से अधिक पांडुलिपियां हैं और अधिकतर नेवारी लिपि हैं। इसकी पांडुलिपियां १३ शताब्दी से २० शताब्दी तक की मिलती है। अर्थात यह ग्रंथ १३ शताब्दी से प्राचीन है।

यहां हमनें ग्रंथ की प्रमाणिकता और प्राचीनता के विषय में देखा। अब हम इसके अद्भुत प्रयोगों को देखते है।

यहां कुछ मंत्र बताएं हैं जिनके प्रयोग से बौद्ध कुत्ते और भैंसा को डराकर भगा देते थे।

यहां दिए कुछ मंत्र से आंखें ठीक हो जाती हैं, अगर किसी के चश्मा लगा हो तो ये मंत्र नोट कर लें, चश्मा उतर जाएगा। जहर उतारने,ज्वर खत्म करने,चोरी रोकने का भी मंत्र हैं। सबसे महत्वपूर्ण शत्रु वश में करने का भी मंत्र हैं, इसी मंत्र से शत्रुओं को वश में करके बौद्ध बना देते थे।

केवल शत्रुओं को वश में करने का मंंत्र नहीं हैं, बल्कि शत्रु का सुख भी गायब करने, शत्रु की गाय का दूध बंद करना, शत्रु का व्यापार नष्ट करने, शत्रु की आंख खुली की खुली रखना, शत्रु के नगर में तुफान लाने का भी मंत्र हैं।

अब तक शत्रु का नुक़सान देखा, मगर शत्रु को एक सप्ताह में ही खत्म करने वाला मंत्र भी पढ़ें। शत्रुओं का आपस में झगड़ा करवाने का भी मंत्र देखिए। ऐसे ही बौद्धों के सभी शत्रु आपस में लड़ते थे।

बौद्धों पर अगर कोई शत्रु सेना आक्रमण करने आती थी तो वो इस मंत्र से उन्हें वहीं के वहीं रोक देते थे। जब ये मंत्र उनके पास था तो फिर पुष्यमित्र और सुंधवा राजा द्वारा बौद्धों के नरसंहार की बात झूठी हैं, क्योंकि बौद्ध तो इस मंत्र से उन्हें रोक भी सकते थे, न केवल रोकना बल्कि शत्रु को जला भी देते थे।

दूध से दही तो सभी बना लेते हैं, मगर छाछ से दही बनाने का भी मंत्र हैं।

शास्त्रार्थ जीतने का भी मंत्र हैं।यही मंत्र था जिससे बौद्ध शास्त्रार्थ में जीत सकते थे।

लो जी स्त्रियों को नग्न करने का मंत्र भी इस ग्रंथ में है। और शत्रु के घर में कलह करवाने का मंत्र भी,पता नहीं ये तांत्रिक बौद्ध ऐसा क्यों लिखते थे।

स्त्री को नग्न ही नहीं बल्कि वशीकरण और मुर्छित करने का भी मंत्र हैं।

ये देखिए मांस मछली खाने का भी विधान इनके तंत्र ग्रंथों में हैं।

यहाँ क्या लिखा हैं पाठक स्वयं पढ़ सकते हैं।

इस प्रकार आपने देखा कि तांत्रिक बौद्ध किस प्रकार शत्रुओं को हरा देते थे। वादी को चुप करा देते थे। वशीकरण कर लेते थे। उन पर शस्त्रों अस्त्रों का कोई असर नहीं होता था।यह ग्रंथ पूरी तरह अंधश्रद्धा, अंधविश्वास को बढ़ावा देता है यह देखना होगा कि क्या नवबौद्ध इस अंधविश्वास पाखंड पर कुछ लिखेंगे?

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