कहा जाता है कि 25 दिसंबर 1927 को बाबा साहेब डॉ अम्बेडकर ने मनुस्मृति का दहन किया था। आमतौर पर लोग यह मान भी लेते हैं और आजकल कुछ समूहो द्वारा मनुस्मृति दहन दिवस भी बनाया जाता है। 25 दिसंबर को सोशैल मीडिया पर मनुस्मृति दहन ट्रेडिंग में आ जाता है,परंतु सत्य क्या है,इस बात पर किसी का भी ध्यान नहीं जाता।आज हम तथ्यों के आधार पर यह बताएंगे कि बाबा साहेब ने कभी भी मनुस्मृति नहीं जलाई और न कभी मनुस्मृति दहन दिवस बनाया,न कभी किसी को मनुस्मृति जलाने को कहा।
घटनाक्रम
सबसे पहले हमें मनुस्मृति दहन के पीछे की भूमिका को समझना होगा। इसलिए हम यहां संक्षिप्त में महत्वपूर्ण घटनाक्रम बता रहे हैं।महाड सत्याग्रह परिषद द्वारा महाड़ सत्याग्रह का आयोजन किया गया। यह आयोजन 25,26,27 दिसंबर 1927 को किया गया। इस सत्याग्रह में कई तरह के आयोजन सम्मिलित थे। महाड सत्याग्रह परिषद के सचिव सीताराम नामदेव शिवतरकर ने कार्यक्रम की अध्यक्षता के लिए बाबा साहेब को आमंत्रित किया गया। 25 को मनुस्मृति दहन किया गया और 27 को सत्याग्रह की समाप्ति की गई।अब हम आगे विस्तार से जानेंगे की मनुस्मृति दहन किसने किया।
महाड़ सत्याग्रह परिषद पर बाबा साहेब का प्रपत्र
महाड सत्याग्रह संग्राम की तैयारी के लिए बाबासाहेब डॉ अम्बेडकर ने एक पत्रक प्रकाशित किया था।इस प्रपत्र में बाबा साहेब ने मनुस्मृति दहन के संबंध में कुछ भी नहीं लिखा।

संदर्भ – बाबा साहेब डॉ अम्बेडकर सम्पूर्ण वाड्मय हिंदी खंड 38 पेज नंबर, 98
महाड़ सत्याग्रह परिषद, 25 दिसंबर 1927 को बाबा साहेब का भाषण
सत्याग्रह के प्रथम दिन 25 दिसंबर 1927 को शाम करीब 4 बजे कार्यक्रमों की शुरुआत हुई।शुरुआत में बच्चों ने ईशस्तवन (ईश्वर की वंदना)गाया। उसके बाद सत्याग्रह कमेटी के सचिव श्री शिवतरकर,श्री श्रीधर बलवंत तिलक, डॉ. पुरुषोतम सोलंकी, एम.एल.सी. के सहानुभूति व्यक्त करने वाले तार और पत्र पढ़ें कर सुनाए। उसके बाद तालियों की गडगडाहट के बीच बाबासाहेब अम्बेडकर ने अपना भाषण पढ़ कर सुनाया। बाबा साहेब ने अपने पूरे भाषण में मनुस्मृति दहन के संबंध में कुछ भी नहीं बोला। यहाँ तक कि पूरे भाषण में मनुस्मृति शब्द का नाम तक नहीं लिया। आपचाहें तो यह भाषण पढ़ सकते हैं। हम संदर्भ दें रहे हैं।
संदर्भ – बाबा साहेब डॉ अम्बेडकर सम्पूर्ण वाड्मय हिंदी खंड 38 पेज नंबर 101 से 113 तक
कार्यक्रम में उपस्थित अतिथि
शिवतरकर,धोंडी नारायण गायकवाड़,कांबले,गंगावणे, वनमाली,पुणे के राजभोज, नासिक के भाऊराव गायकवाड़ उपस्थित रहें।एवं सवर्ण समाज से सहस्त्रबुदधे और के. प्रधान बंध भी उपस्थित थे।

संदर्भ-बाबा साहेब डॉ अम्बेडकैर सम्पूर्ण वाड्मय हिंदी खंड 38 पेज नंबर 97
महाड़ सत्याग्रह परिषद, 25 दिसंबर को पारित प्रस्ताव
महाड़ सत्याग्रह परिषद में 25 दिसंबर को बाबा साहेब का भाषण हुआ।भाषण के बाद 25 दिसंबर को ही महाड़ सत्याग्रह परिषद ने कुल चार प्रस्ताव पारित किए।महाड़ सत्याग्रह परिषद के दूसरे प्रस्ताव में मनुस्मृति दहन के लिए प्रस्ताव रखा गया था। यह प्रस्ताव एक चितपावन ब्राम्हण सदस्य जिनका नाम श्री गंगाधर नीलकंठ सहस्त्रबुददे था, उन्होंने रखा। इस प्रस्ताव का समर्थन राजमोज जी ने किया और इसकी पुष्टि थोरात जी ने किया था।बाबा साहेब न तो इस प्रस्ताव के प्रस्तावक थे न समर्थक और न ही इस प्रस्ताव की पुष्टि की।

संदर्भ – बाबा साहेब डॉ अम्बेडकर सम्पूर्ण वाड्मय हिंदी खंड 38 पेज नंबर 115
महाड़ सत्याग्रह परिषद के अन्य प्रस्ताव भी देखें

संदर्भ – बाबा साहेब डॉ अम्बेडकर सम्पूर्ण वाड्मय हिंदी खंड 38 पेज नंबर 113 एवं 114

संदर्भ – बाबा साहेब डॉ अम्बेडकर सम्पूर्ण वाड्मय हिंदी खंड 38 पेज नंबर 115 एवं 116

संदर्भ – बाबा साहेब डॉ अम्बेडकर सम्पूर्ण वाड्मय हिंदी खंड 38 पेज नंबर 115 एवं 116
मनुस्मृति दहन कब और कैसे हुआ
25 दिसंबर 1927 को मनुस्मृति दहन के लिए एक अग्नि वेदी बनाया गया और उसे चंदन की लकड़ी से भरा गया।करीब रात 9 बजे मनुस्मृति का दहन गंगाधर नीलकंठ सहस्त्रबुद्धे ने अन्य पांच-छह अस्पृष्य साधुओं के साथ किया।यहां स्पष्ट हो जाता है कि मनुस्मृति बाबा साहेब ने नहीं जलाया क्योंकि मनुस्मृति दहन के समय बाबा साहेब थे ऐसा लिखा किसी की पुस्तक में नहीं मिलता और यह भी प्रमाण कहीं भी नहीं मिलता की मनुस्मृति का दहन बाबा साहेब ने 25 दिसंबर 1925 को किया था। प्रमाण के आधार पर यह सिद्ध होता है कि मनुस्मृति चितपावन ब्राम्हण गंगाधर नीलकंठ सहस्त्रबुद्धे ने किया था और उनके इस कार्य में पांच-छः अस्पृष्य साधु उपस्थित थे।

1927 के बाद बाबा साहेब का मनुस्मृति पर विचार
1927 के बाद बाबा साहेब ने मनुस्मृति पर हिंदू कोड बिल बहस के दौरान 1949 में अपने विचार रखें।बाबा साहेब डॉ अम्बेडकर ने स्वयं कहा की मनुस्मृति महिलाओं को संपत्ति का अधिकार देती है।अगर बाबा साहेब मनुस्मृति को बुरा मानते तो यह बात न कहते।अगर बाबा साहेब मनुस्मृति को बुरा मानकर उसका दहन किए होते तो मनुस्मृति के पक्ष में यह बात नहीं कहते।

Reference: Dr. Ambedkar Writings and Speeches, Volume 14, Part – 1. First published by the Government of Maharashtra in 1995. Page 280-81
उपसंहार
बाबा साहेब ने 1949 में हिंदू कोड बिल बहस के दौरान स्वयं कहा की मनुस्मृति महिलाओं को संपत्ति का अधिकार देती है।अगर बाबा साहेब मनुस्मृति को बुरा मानते तो यह बात न कहते।
बाबा साहेब ने मनुस्मृति दहन की घटना के संबंध में केवल दो बार जिक्र किया।पहली बार 3 फरवरी 1928 को बहिष्कृत भारत में और दूसरी बार 1938 में,पत्रकार टी.वी पर्वते जी के साथ एक साक्षात्कार में पर,यहां पर भी बाबा साहेब ने कभी यह नहीं कहा कि मनुस्मृति का दहन उन्होंने किया।इसके बाद बाबा साहेब ने कही भी मनुस्मृति दहन के संबंध में कभी कोई बात नहीं कि।
ध्यान देने वाली बात यह है कि 1927 के बाद भी बाबा साहेब डॉ अम्बेडकर ने 1949 को हिंदू कोड बिल बहस के दौरान मनुस्मृति के समर्थन में बातें कही।
सारे तथ्यो को देखा जाए तो उससे स्पष्ट होता है कि 25 दिसंबर 1927 को बाबा साहेब डॉ अम्बेडकर ने मनुस्मृति दहन नहीं किया। बाबा साहेब डॉ अम्बेडकर ने मनुस्मृति दहन का कोई प्रस्ताव कभी भी नहीं दिया और न ऐसी किसी कार्य की स्वीकृति दी।
मनुस्मृति दहन का काम श्री गंगाधर नीलकंठ सहस्त्रबुद्धे ने अन्य पांच-छः साथी के साथ रात्रि की अंधेरे में किया।
सभी प्रमाण से सिद्ध होता है कि बाबा साहेब ने मनुस्मृति का दहन कभी भी नहीं किया और न कभी कोई मनुस्मृति दहन दिवस मनाई और न कभी किसी को मनुस्मृति दिवस मनाने को कहा।
अतः जो भी लोग भी यह कहते हैं कि बाबा साहेब ने मनुस्मृति जलाई वो सरासर झूठ बोलते हैं।बाबा साहेब डॉ अम्बेडकर के नाम पर मनुस्मृति दहन दिवस मनाने वाले लोग केवल समाज में भ्रम फैला रहे हैं और बाबा साहेब के नाम पर अपना प्रोपोगेंडा चला रहे हैं। हमें ऐसे लोगों से सतर्क रहने की जरूरत है।

