यूरोपीय समाज में महिलाओं को स्तन यातनाएं देंने का इतिहास रहा है।मध्यकालीन यूरोपियन समाज में यह बहुत प्रचलित थी। आज हम इस विषय में प्रमाणित तथ्यों के आधार पर बात करेंगे। साथ ही यह लेख यूरोप के उन महिलाओं को समर्पित है जिन्हें स्तन यातना जैसी भयंकर यातना दी गई और उन्हें मार दिया गया।
ब्रेस्ट रिपर
आइए सबसे पहले ब्रेस्ट रिपर के बारे में जानते है।ब्रेस्ट रिपर” एक स्तन यातना उपकरण था।जिसका उपयोग मुख्य रूप से 13वीं सदी से लेकर 19वीं सदी तक महिलाओं पर किया जाता था।इसका प्रयोग मुख्य रूप से यूरोप में प्रचलित था। 15 सदी से 17 सदी के बीच बहुत बड़ी संख्या में महिलाओं को स्तन यातनाएं दी गई।ब्रेस्ट रिपर लोहे का बना एक औजार है।इसमें नुकीले उभार होते है। यातना देने से पहले इस औजार को गर्म या अत्यधिक ठंडा कर लिया जाता था। फिर महिला के स्तन पर कई बार चुभा कर यातना दी जाती थी,और महिला के स्तन को उखाड़ दिया जाता था।

अब जानते हैं कि ब्रेस्ट यातना किन महिलाओं को दिया जाता था
स्तन यातनाएं दिए जाने का कारण निम्नलिखित थें:
(1)वैश्यावृत्ति में संलिप्त आरोप वाली महिलाएं
(2)बिना विवाह के मां बनने वाली महिलाएं
(3)शैतान के साथ यौन संबंध बनाने वाली महिलाएं
(4)चुड़ैल या डायन का आरोप जिन महिलाओं पर होता था उन्हें भी ये स्तन यातनाएं देकर, उनसे आरोप स्वीकार कराया जाता था।आरोप स्वीकार करने के बाद उन्हें जला कर मार दिया जाता था।कई बार वे यातना के दौरान ही मर जाती थी।
(5)जिन महिलाओं का गर्भपात हो जाता था। उन्हें भी स्तन यातनाएं दी जाती थी।
(6)मूर्तिपुजक और ईसाई धर्म को न मानने और धर्म परिवर्तन न करने वाली महिलाओं को भी स्तन यातनाएं दी जाती थी।
(6)रोमन ने पूर्व में ईसाई महिलाओं को भी स्तन यातनाएं दी।
(7)गोवा में भी धर्म परिवर्तन न करने वाली महिलाओं को भी स्तन यातनाएं दी
(8)चर्च डायन चुड़ैल के आरोपित महिलाओं के ट्रायल के लिए इस तरह के यातना देने और सजा देने के लिए अधिकृत थे।
(9)ब्रेस्ट यातना फ्रांस रोम जर्मनी स्कॉटलैंड आयरलैंड यूके बेल्जियम सहित पूरे यूरोप में प्रचलित हुआ।
(10)चर्च ने जब यूरोप और बाद में यूरोप के बाहर इनक्यूजिशन शुरू की तब भी महिलाओं को ब्रेस्ट यातनाएं दी गई।
(11)इनक्यूजिशन एक जांच थी जिसमें ईसाई धर्म को न मानने वाले व्यक्ति को अपने पापों के लिए माफी मांगने अर्थात धर्म परिवर्तन के लिए यातनाएं देना था। ये भारत में गोवा इनक्यूजिशन के दौरान स्तन यातनाएं दी गईं।
स्तन यातनाओ के प्रमाण
आइए अब स्तन यातनाओ से जुड़े कुछ प्रमाण देखते हैं:
यातना संग्रहालय बेल्जियम
15 वी शताब्दी का यह ब्रेस्ट रीपर, यातना संग्रहालय बेल्जियम में आज भी रखा है।

अगाथा
अगाथा नाम की एक महिला को स्तन यातना दिया गया।इनका जन्म रोमन साम्राज्य में 231 ईस्वी में हुआ था।इनकी मृत्यु 251 ईस्वी में हुई।रोमन राजा डेसियन के शासन में इन्हें यातनाएं दी गई।रोमन प्रीफेक्ट क्विंटियानस की प्रेम प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया, जिसके कारण उन्हें यह यातनाएं दी गई।

17 वी शताब्दी में फ्रांस में अगाथा के स्तन उकेरे गए जो आज भी मौजूद हैं।

बारबरा
इन्हें मूर्ति पूजा के आरोप में स्तन यातना देकर मार दिया गया था।इनका जन्म तीसरी शताब्दी के मध्य में और मृत्यु चौथी शताब्दी के शुरू आत में हुआ।बारबरा के कथा की विवरण जैकोबस डी वोरागीन की 12वीं सदी की गोल्डन लीजेंड एवं हैरी एफ विलियम्स की एंग्लिकन कम्युनिटी ऑफ द रिसरेक्शन (1975) पुस्तक में है।

स्पेनिश इनक्यूजिशन ब्रेस्ट टॉर्चर (1478-1834)
ईशनिंदा और ईसाई धर्म को न अपनाने वाली महिलाओं को स्तन यातनाएं दी जाती थी। इसका शिकार ज्यादा तर यहूदी महिलाएं बनीं।1482 में 1482 में पोप सिक्सटस ने धर्माधिकरण की कमान संभालने के लिए एक परिषद नियुक्त की, जगह जगह अदालत, यातना कक्ष बनाए गए।टॉर्केमाडा को इस कार्य के लिए जनरल बनाया गया।
स्तन यातनाओ के कुछ चित्रण



उपसंहार
भारत में आकर अधिकांश पश्चिमी इतिहासकारों ने भारतीय इतिहास को लिखा और उसमें भारतीयों की छवि को महिला विरोधी सिद्ध करने का प्रयास किया। इन लोगों ने कुछ कुरीतियों को काफी बढा चढाकर लिखा जैसे सती प्रथा, देवदासी प्रथा आदि। किन्तु इन लोगो ने विश्वभर से अपने उन काले कारनामों को छिपाए रखा जिसमें इन्होने महिलाओं के साथ घोर अमानवीय व्यवहार किया था।उन्हीं यातनाओं में से एक भयंकर यातना हैं,स्तन यातनाएँ।
हालांकि आज अनेकों यूरोपियन यह स्वीकार करते हैं कि उनके देशों में ये सब कुरीतियां थी।किन्तु भारत के कुछ अंग्रेज प्रेमी तथाकथित भारतीय यूरोप के समाजिक कुरीतियों का बचाव करते दिख जाएंगे।



Leave a Reply