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जोगेंद्र नाथ मंडल,दलित मुस्लिम एकता का असफल प्रयोग

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कौन है जोगेंद्रनाथ मंडल

जोगेंद्रनाथ मंडल का जन्म ब्रिटिश इंडिया की बंगाल प्रेसिडेंसी के बैरीसाल जिले 29 जनवरी 1904 को हुआ था।मंडल दलित समुदाय से आते थे उनका जन्म नमो शूद्र जाति में हुआ था।1929 में स्नातक और 1934 में कानून की पढ़ाई पूरी की 1937 में बंगाल विधानसभा के लिए चुने गए और बाद में मंत्री बने।मंडल जिन्ना के प्रभाव में आने के कारण मुस्लिम लीग से जुड़ गए।बाद में पाकिस्तान का समर्थन किया और पाकिस्तान चले गए।1950 में पाकिस्तान में अपने मंत्री पद से इस्तीफा देकर भारत में शरण ली।5 अक्टूबर,1968 को बनगांव में उनका निधन हो गया।

मुस्लिम लीग और जिन्ना की सोच

जब जिन्ना ने पाकिस्तान की मांग की तो उस वक्त से ही वो पाकिस्तान के लिए दलितों के समर्थन के लिए काम करना चाहते हैं।मुस्लिम लीग दलितों पर प्रभाव वाले दलित नेताओ को अपने पक्ष में करना चाहती थी।इसके पीछे वजह यह थी कि भारत पाकिस्तान बंटवारा होना था, और कछ ऐसे जगह थे जहां हिंदू और मुस्लिम आबादी लगभग बराबर थी, मुस्लिम लीग इन क्षेत्रों को पाकिस्तान में मिलाना चाहती थी, जनमत-संग्रह में दलित मुस्लिम लीग को वोट करें, ताकि वह क्षेत्र पाकिस्तान में जा सके, इसलिए मुस्लिम लीग दलित नेता के माध्यम से यह कार्य करना चाहती थी।

मंडल का पाकिस्तान के लिए किया गया कार्य

मंडल ने ऐसे सभी जगह पाकिस्तान का प्रचार किया जहां दलित मुस्लिम आबादी लगभग बराबर थी।
असम का सिलहट् जहां जनमत-संग्रह होना था क्योंकि वहां भी हिंद मुस्लिम आबादी बराबर थी, मंडल ने मुस्लिम लीग के लिए प्रचार किया, दलितों को पाकिस्तान के लिए वोट करने को कहा, और मुस्लिम लीग को जीत मिली सिलहट पाकिस्तान में चला गया।1943 में बंगाल में अकाल पड़ा 30 लाख लोग भूख से मर गए, उस समय मंडल ख्वाजा नजीमुद्दीन की सरकार में मंत्री रहे, पर मंडलू ने अकाल मुस्लिम लीग की सरकार की कोई आलोचना नहीं कि बल्कि वो खुद मुस्लिम लीग में बने रहे।मुस्लिम् लीग द्वारा जब 16 अगस्त 1946 को डायूरेक्ट एक्शन में हजारों हिन्दुओं की कल्लेआम हुआ, उस समय मंडल ने मुस्लिम लीग का समर्थन किया।मंडल ने पाकिस्तान में इस्लामिक राज्य का भी समर्थन किया।

मुस्लिम लीग को समर्थन देने पर मंडल का तर्क

मंडल मानते थे कि उच्च जाति के हिंदुओं (सवर्णों) के बीच रहने से शूद्रों की स्थिति में सुधार नहीं हो सकता। इसलिए पाकिस्तान दलितों के लिए एक बेहतर अवसर हो सकता है।साथ ही उनका तर्क था पाकिस्तान दलित और मुस्लिमो का देश होगा, दलित और मुस्लिमो दोनों की आर्थिक सामाजिक स्थिति एक जैसी है। भारत में उच्च जाति का राज होगा जहां दलितो को अधिकार नहीं मिलेंगे।

मंडल के कारण हुए दलितों को नुक़सान

मंडल के कारण लाखों दलित आबादी पाकिस्तान में फस गई और वो आज की प्रताड़ित हो रहे हैं।पाकिस्तान में द‌लित हिन्दुओ के साथ कितना अत्याचार हुआ उसका उल्लेख मंडल खुद अपने इस्तीफे पर करते हैं।ऐसे क्षेत्र जहां हिंदू मुस्लिम आबादी बराबर थी वहां मंडल ने प्रचार करके दलितों का वोट मुस्लिम लीग में दिलवा दिया जिससे बहुत बड़ी दलित हिन्दू आबादी पाकिस्तान में चली गई।
मंडल के कहने पर बहुत से दलित पाकिस्तान में रुक गई आज वो सब पाकिस्तान में प्रताडित हो रहे हैं।

सोशल मीडिया पर दो प्रपोगेंडा

पहला प्रपोगेंडा यह की बाबा साहेब बंगाल से संविधान सभा में मुस्लिम वोट के कारण पहुंचे।
और दूसरा प्रपोगेंडा बाबासाहेब को संविधान सभा में पहुंचाने वाले मंडल थे।

क्या मंडल ने अम्बेडकर को संविधान सभा में पहुंचाया

सोशल मीडिया से मूलनिवासी नवबौद्ध विचारधारा वाले मंडल को महापुरुष बताते हैं और यह कहते हैं कि साहेब अम्बेडकर को मंडल ने बंगाल से चुनाव जिताया।संविधान सभा में मंडल के कारण अम्बेडकर आ सके।जबकि सत्य यह है कि बाबा साहेब संविधान सभा में प्रतिनिधित्व महाराष्ट्र से कर रहे।शुरू में बाबा साहेब मुंबई से चुनाव लड़ा और हार गए।मुस्लिम लीग बाबा साहेब को भी लीग में लाना चाहती थी इसलिए मुस्लिम लीग के कहने पर मंडल ने बाबा साहेब को बंगाल से चुनाव लडने को कहा।बाबा साहेब जशौर खुलना से 1946 में, चनाव जीते, जशौर खलना में मुस्लिम आज्ञादी 48% और हिंदू 52% थे। बाबा साहेब ने बाद में इस सीट से इस्तीफा दे दिया ।इसके बाद कांगेस ने बाबा साहेब को महाराष्ट्र से संविधान सभा में भेजा।

मंडल का इस्तीफा, दलित मुस्लिम एकता के असफल होने की गवाही

दलित मुस्लिम एकता का राग अलापने वाले मंडल का हाल पाकिस्तान में क्या हुआ उसका अंदाजा मंडल के इस्तीफे में लिखें वृतांत से लगाया जा सकता है।और जो दलित,मंडल की दलित मुस्लिम एकता की झूठी कहानी पर भरोसा करके पाकिस्तान चले गए वो सभी आज भी धार्मिक आधार पर पाकिस्तान में प्रताडित हो रहे है।मंडल का इस्तीफा सबसे बड़ी गवाही है कि दलित मुस्लिम एकता केवल एक राजनीतिक स्वार्थ है इसमें दलितों का कोई हित नहीं।

मंडल का इस्तीफा

9 अक्टूबर 1950 को  मंडल ने तत्कालीन पाकिस्तान के प्रधानमंत्री लियाकत अली खान को अपना इस्तीफा भेजा था।

मंडल के इस्तीफे में उल्लेखित कुछ महत्वपूर्ण तथ्यों को हम यहां बता रहे हैं

1.मंडल के इस्तीफा में डायरेक्ट एक्शन

मंडल लिखते हैं कि  “उस वर्ष अगस्त के 16 वें दिन मुस्लिम लीग द्वारा “प्रत्यक्ष कार्रवाई दिवस” के रूप में मनाया गया। इसका परिणाम एक नरसंहार के रूप में सामने आया… अक्टूबर 1946 में कलकत्ता नरसंहार के बाद “नोआखली दंगा” हुआ। वहां, अनुसूचित जातियों सहित हिंदु‌ओं को मार दिया गया और सैकड़ों लोगों को इस्लाम में परिवर्तित कर दिया गया। हिंदू महिलाओं का बलात्कार किया गया और उनका अपहरण किया गया। मेरे समुदाय के लोगों को भी जान-माल का नुकसान उठाना पड़ा।”

2.मंडल के इस्तीफे में पुलिस द्वारा किए गए अत्याचार का विवरण

मंडल लिखते हैं कि मुझे यह कहते हुए बेहद अफसोस हो रहा है कि विभाजन के बाद, अनुसूचित जातियों को किसी भी मामले में उचित व्यवहार नहीं मिला है… मैंने आपके संज्ञान में पुलिस द्वारा  किए गए बर्बर अत्याचारों की घटनाओं का लाया है। मैंने पुलिस प्रशासन और मुस्लिम लीग के नेताओं के एक वर्ग द्वारा अपनाई गई हिंदू विरोधी नीति को आपके संज्ञान में लाने में संकोच नहीं किया।”

3.मंडल के इस्तीफे में पाकिस्तान में हिंदुओं पर अत्याचार की घटनाओं का ब्यौरा

मंडल ने अपने इस्तीफे में यह विस्तार से लिखा की कैसे पाकिस्तान में हिंदूओ का कत्ल किया गया, हिंदू विरोधी हिंसा में मुस्लिम लीग, प्रशासन, पुलिस ये सब शामिल थे।उन्होंने गोपालगंज के एक गांव में हुई एक घटना का जिक्र किया है, जहां एक मुसलमान की झूठी शिकायत पर स्थानीय नामशूद्रों पर क्रूर अत्याचार किए गए थे। उन्होंने लिखा है कि कैसे अधिकारियों ने मुसलमानों द्वारा की गई शिकायत को सच मान लिया और नामशूद्र दलितों को दंडित करने के लिए मौके पर सशस्त्र पुलिस भेजी। स्थानीय अधिकारियों की ओर से की गई इस क्रूर कार्रवाई ने एक बड़े इलाके में दहशत पैदा कर दी।

4.मंडल का इस्तीफे में हिंदू विरोधी हिंसा का विवरण

मंडल कहते हैं, उन्होंने हिंदू विरोधी हिंसा रोकने के लिए जिला मजिस्ट्रेट और एसपी को जांच के लिए लिखा, लेकिन जिला अधिकारियों को लिखे गए उनके पत्रों की कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। उन्होंने आगे कहा कि इसके बाद मैंने इस मामले को पाकिस्तान के सर्वोच्च अधिकारियों के संज्ञान में लाया, जिनमें आप भी शामिल हैं, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।निर्दोष पुरुषों और महिलाओं को क्रूरता से प्रताड़ित किया गया, कुछ महिलाओं के साथ बलात्कार किया गया, उनके घरों पर छापे मारे गए और पुलिस और स्थानीय मुसलमानों द्वारा उनकी संपत्ति लूट ली गई।”

5.मंडल का इस्तीफे में पाकिस्तानी सेना द्वारा हिंदू महिलाओं के रेप विवरण

मंडल के अनुसार, सेना ने न केवल इन लोगों पर अत्याचार किया और हिंदुओं के घरों से जबरन सामान छीन लिया, बल्कि हिंदुओं को रात में अपनी महिलाओं को सेना की कामुक इच्छाओं को पूरा करने के लिए शिविर में भेजने के लिए मजबूर किया। मंडल का कहना है कि प्रधानमंत्री को मामले से अवगत कराने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई।

6.मंडल का इस्तीफे में , हिंदू मंदिर तोड़ने का विवरण
मंडल पाकिस्तान में हिंदुओं के खिलाफ हो रहे अत्याचारों के बारे में बताते हैं, “मुसलमानों को हिन्दूओ संपत्ति छीनने के के लिए लिए उकसाया। कई लोगों की हत्या कर दी गई और पुरुषों और महिलाओं का जबरन धर्म परिवर्तन कराया गया। घर के देवी-देवताओं की मूर्तियों को तोड़ दिया गया और पूजा स्थलों को अपवित्र और नष्ट कर दिया गया। पुलिस, सेना और स्थानीय मुसलमानों ने कई हिंदू महिलाओं के साथ बलात्कार किया,”।

7.पूरा गांव तबाह किया गया
मंडल लिखते हैं हैं, “मैंने 28 फरवरी, 1950 को कलशिरा और एक या दो पड़ोसी गांवों का दौरा किया… जब मैं कलशिरा गांव आया, तो मैंने पाया कि यह जगह उजाड़ और खंडहर में तब्दील हो चुकी है। एसपी की मौजदगी में मुझे बताया गया कि इस गांव में 350 घर थे, इनमें से सिर्फ तीन को ही बचाया गया था और बाकी को ध्वस्त कर दिया गया था। नमोशूद्रों के संपत्ति और मवेशी सब लूट लिए गए थे।”

8.अधिकारियों ने मुस्लिम भीड़ को हिंदुओं को लूटने में मदद की
मंडल लिखते हैं कि, पाकिस्तान में दंगों के दौरान हिंदुओं के खिलाफ अपराध करने के लिए अधिकारियों ने भीड़ से हाथ मिला लिया। शहर के सभी हिस्सों में आगजनी, हिंदुओं की दुकानों और घरों में लूटपाट और जहाँ कहीं भी हिंदू मिले, उनकी हत्याएँ पूरे जोर-शोर से शुरू हो गई, यहाँ तक कि उच्च पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में भी ये सब किया गया।मंडल ने बताया कि कैसे पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में हिंदुओं की आभूषण की दुकानों को लूटा गया। मंडल ने बताया कि पुलिस ने लूट को रोकने की कोशिश नहीं की, बल्कि लुटेरों को सलाह और निर्देश देकर उनकी मदद की।

9.हिंदूओ का पलायन
मंडल के अनुसार बंगाल से हिंदुओं का बड़े पैमाने पर पलायन मार्च के आखिरी दिर्ना में ही शुरू हो गया था। ऐसा लग रहा था कि कुछ ही समय में सभी हिंदू भारत चले जाएंगे।

10.पाकिस्तान हिंदुओं को खत्म करना चाहता है
मंडल लिखते हैं, “मैं इस संबंध में अपनी दृढ़ धारणा को दोहराना चाहता है कि पाकिस्तान सरकार अभी से हिंदूओं को बाहर निकालने की सुनियोजित नीति पर चल रही है। मुझे कहना होगा कि पाकिस्तान से हिंदुओं को बाहर निकालने की यह नीति पश्चिमी पाकिस्तान में पूरी तरह सफल रही है और पूर्वी पाकिस्तान में भी पूरी होने वाली है।”

11.पाकिस्तान में हिंदुओं का भविष्य अंधकारमय
1950 में प्रधानमंत्री को लिखे अपने त्यागपत्र में मंडल ने दृढ़तापूर्वक कहा कि वर्तमान स्थिति न केवल असंतोषजनक है, बल्कि पूरी तरह निराशाजनक है और भविष्य पूरी तरह अंधकारमय और निराशाजनक है।मुसलमानों द्वारा हिंदुओं के साथ किए जाने वाले भेदभाव पर प्रकाश डालते हुए मंडल बताते हैं कि बाजारों में हिंदुओं द्वारा बेची जाने वाली जूट और अन्य कृषि वस्तुओं की कीमत का पूरा भुगतान मुस्लिम खरीदारों ‌द्वारा नहीं किया जाता है।

12.पाकिस्तान में जबरन धर्मांतरण
पश्चिमी पाकिस्तान में गैर-मुसलमानों पर हो रहे अत्याचारों का जिक्र करते हुए मंडल कहते हैं कि विभाजन के बाद सिंध में हिंदूओ के लगभग एक लाख लोगों को इस्लाम में धर्मातरित कर दिया गया।
सिंध और पाकिस्तान की राजधानी कराची में अभी भी रह रहे हिंदुओं की छोटी संख्या की हालत बेहद दयनीय है। मेरे पास कराची और सिंध के 363 हिंदू मंदिरों और गुरुद्वारों की सूची है जो अभी मुसलमानों के कब्जे में हैं।

13.पाकिस्तान हिंदुओं के लिए ‘शापित’
हिंदुओं के मामले में पाकिस्तान की समग्र तस्वीर पेश करते हुए मंडल कहते हैं कि पाकिस्तान के हिंदुओं को उनके अपने घरों में ही “राज्यविहीन” बना दिया गया है। उन्होंने कहा कि उनका कोई और दोष नहीं है, सिवाय इसके कि वे हिंदू धर्म को मानते हैं।मंडल ने आगे लिखा है कि लंबे संघर्ष के बाद वह इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि पाकिस्तान हिंदुओं के रहने के लिए कोई जगह नहीं है।

उपसंहार

जोगेंद्र नाथ मंडल का जीवन हम सब देख सकते हैं, किस तहर से मुस्लिम लीग की सहायता की और पाकिस्तान बनाने में सहयोग किया परंतु पाकिस्तान बनते ही वो वहां नहीं रह पाए और अपने त्यागपत्र पर हिंदूओ के खिलाफ हो रहे हिंसा पर विस्तृत लिखा।मंडल तो वापस भारत आ गए पर लाखों दलितों को पाकिस्तान में छोड़ आए।जो दलित मंडल के कारण पाकिस्तान चले गए वो आज धार्मिक आधार पर हिंसा और भेदभाव झेल रहे हैं।मंडल एक शरणार्थी बन कर गुमनामी में अपने जीवन के अंतिम समय पछतावे में बिताया।मंडल को पाकिस्तान के इतिहास से मिटाया गया और ग‌द्दार कहा गया।इससे स्पष्ट है आज जो दलित मुस्लिम एकता की बात करते हैं ये केवल एक असफल प्रयोग है।


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