सोशल मीडिया पर बाबा साहेब डॉ अम्बेडकर के सरनेम को लेकर तरह तरह से झूठ और प्रोपोगेंडा फैलाया जा रहा है।आज हम प्रमाणो के आधार पर इन प्रोपोगेंडा फैलाने वालों को एक्सपोज़ करेंगे।
आइए पहले देखते हैं कि ये प्रोपोगेंडावादी लोग क्या क्लेम करते हैं।
इनका पहला क्लेम है कि बाबा साहेब डॉ अम्बेडकर का सरनेम, उनके ब्राह्मण गुरु जी द्वारा नहीं दिया गया।इनका दूसरा क्लेम है कि बाबा साहेब अम्बेडकर के पिता जी भी अम्बेडकर सरनेम प्रयोग करते थे।
इनका तीसरा क्लेम है कि अम्बेडकर सरनेम उनके गांव से आया, महाराष्ट्र में लोग अपने सरनेम को अपने गांव से जोड़कर लिखते हैं।
अब आइए देखते हैं कि ये लोग अपने क्लेम के पक्ष में क्या प्रमाण और तर्क देते हैं
अम्बेडकर सम्पूर्ण वाडमय अंग्रेजी संस्करण खंड् 10 पेज नंबर 3,इसका संदर्भ देते हुए कहते हैं कि बाबा साहेब के पिता जी का सरनेम भी अम्बेडकर था, इसलिए अम्बेडकर सरनेम उन्हें अपने पिता जी से मिला, ब्राम्हण गुरु जी से नहीं।बाबा साहेब के स्कूल का एक बोर्ड दिखाते हैं और कहते हैं कि बाबा साहेब जहां पढ़ते थे वहां कोई अम्बेडकर सरनेम वाला मास्टर ही नहीं था।और तर्क यह भी देते हैं कि अगर अम्बेडकर सरनेम ब्राम्हण मास्टर का सरनेम है तो अम्बेडकर गौत्र या वंश का दूसरा ब्राम्हण पूरे देश में क्यों नहीं है?
आइए एक एक करके सबसे पहले इन प्रोपोगेंडा वाले लोगों के प्रमाण और तर्क की समीक्षा करते हैं।
सबसे पहले, अम्बेडकर सम्पूर्ण वाड्मय अंग्रेजी संस्करण खंड 10 पेज नंबर 3 देखते हैं


यहां बाबा साहेब के पिता जी का नाम रामजी मालोजी अम्बेडकर लिखा है परंतु की नीचे एक नोट लिखा है।इस नोट में स्पष्ट लिखा है कि “ऊपर जो भी जानकारी दी गई है वो इंडियन इनफार्मेशन नाम की पत्रिका में, पर्सनालिटी शीर्षक से छापा गया एक लेख है, लेख किसने लिखा, ये पता नहीं अर्थात लेखक का नाम अज्ञात है” जब लेखक ही अज्ञात है ,अतः अम्बेडकर सम्पूर्ण वाड्मय अंग्रेजी संस्करण खंड 10 पेज नंबर 3 को क प्रमाण नहीं माना जा सकता।
अब देखते हैं बाबा साहेब के स्कूल का बोर्ड
बोर्ड को ध्यान से देखिए ये स्कूल के मुख्याध्यापक(हेडमास्टर) की सूची है, जबकि अम्बेडकर के गुरु जी सिर्फ वहा मास्टर थे, मुख्याध्यापक ( हेडमास्टर) नही, इसलिए यहां उनका नाम नहीं है।

अब इनका तर्क देखते हैं, कि अम्बेडकर गौत्र या वंश का ब्राह्मण क्यों नहीं
प्रश्न यह भी उठता है कि अम्बेडकर गौत्र या वंश का कोई दलित क्यों नहीं?
प्रश्न यह भी उठता है कि बाबा साहेब के पहले अम्बेडकर गौत्र या वंश का कोई दलित क्यों नहीं मिलता?
प्रश्न यह भी उठता है, बाबासाहेब के गांव अंबाडवे में कोई दलित अम्बेडकर सरनेम वाला क्यों नहीं मिलता ?
बाबा साहेब के ब्रह्मण गुरु जी की तीसरी पीढ़ी अभी भी है और ये सब अम्बेडकर सरनेम लिखते हैं।
अतः अम्बेडकर गौत्र या वंश का ब्राह्मण क्यों नहीं, यह कहने से ये सिद्ध नहीं होता की अम्बेडकर सरनेम बाबा साहेब को उनके मास्टर से नहीं मिला।
एक भ्रामक जानकारी जो इन प्रपोगेंडावादी द्वारा फैलाया जाता है वो भी देखते है
एक रजिस्टर की फोटो शेयर की जाती है और क्लेम किया जाता है कि ये बाबा साहेब का स्कूल रजिस्टर है, इसमें बाबा साहेब के पिता का सरनेम अंबावडेकर है जो आगे चलकर अंबेडकर हो गया।पहले तो यह की इस रजिस्टर की कोई प्रमाणिकता नहीं, किसी भी सरकारी संस्था ने इसकी पुष्टि नहीं की।साथ गौर से देखिए सबके पिता का नाम इंग्लिश में है पर बाबा साहेब के पिता जी का नाम मराठी में है, इससे पता चलता है इसमें छेड़छाड़ की गई ।साथ ही ये ही लोग कहते है की संपूर्ण वांग्मय 10 में बाबा साहेब के पिता जी का सरनेम अम्बेडकर है जबकि यहां अंबावडेकर अंकित है। अतः यह जानकारी भ्रामक और आधारहीन है।

आइए अब आपको प्रणाम दिखाते हैं की बाबा साहेब अम्बेडकर जी का सरनेम उन्हें अपने ब्राह्मण गुरु जी से मिला
प्रमाण एक
धनंजय कीर नेबाबा साहेब अम्बेडकर जी की जीवनी लिखी, यह जीवनी आम्बेडकर जी के जीवन का में प्रकाशित हुई और और साहेब ने धनंजय कीर को इंटरव्यू भी दिया।धनंजय कीर ने स्पष्ट लिखा है कि बाबा साहेब को अम्बेडकर सरनेम उनके ब्राह्मण गुरु ने दिया। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि बाबा साहेब डॉ अम्बेडकर के पिता का सरनेम सकपाल था।

प्रमाण दो
लोकसभा सचिवालय भारत सरकार द्वारा प्रकाशित पुस्तक एमिनेंट पार्लियामेंटेरियन मोनोग्राफ सीरीज खंड 12 पेज नंबर 1 में बाबासाहेब डॉ अम्बेडकर के पिता जी का नाम रामजी मालोजी सकपाल प्रकाशित है। यहां संदर्भ धनंजय कीर की पुस्तक अंकित है।
यहा भी स्पष्ट होता है कि बाबा साहेब डॉ अम्बेडकर के पिता जी का सरनेम सकपाल था।

प्रमाण तीन
सोशल जस्टिस एंड एम्पावरमेंट विभाग भारत सरकार ने बाबा साहेब अम्बेडकर की जीवनी अपनी बेबसाइट में प्रकाशित की है। यहां भी बाबा साहेब अम्बेडकर जी के पिता जी का नाम रामजी मालोजी सकपाल प्रकाशित है।यहा भी स्पष्ट है कि बाबा साहेब के पिता जी का सरनेम सकपाल था।

प्रमाण चार
बाबासाहेब डॉ अम्बेडकर जी की दूसरी पत्नी सविता अम्बेडकर जी ने एक पुस्तक लिखी है जिसका नाम है, बोबा साहेब माई लाइफ विथ अम्बेडकर, इस पुस्तक में बाबासाहेब डॉ अम्बेडकर जी के पिता जी का नाम सुबेदार रामजीराव लिखा है।यहा भी देख सकते हैं कि यहां भी स्पष्ट होता है कि बाबा साहेब के पिता जी का सरनेम अम्बेडकर नहीं था।

प्रमाण पांच
मराठी पत्रिका नवयग को बाबा साहेब डा अम्बेडकर ने 13/4/1947 को दिए इंटरव्यू में में अम्बेडकर ने कहा था कि अम्बेडकर सरनेम उन्हें अपने गुरु जी से मिला। श्री खैरमोडे ने बाबा साहेब अम्बेडकर की जीवनी लिखी एवं इस इंटरव्यू का उल्लेख भी अपनी पुस्तक में किया।

प्रमाण छः
एबीपी न्यूज मराठी में बाबासाहेब डॉ अम्बेडकर जी के पोते, श्री प्रकाश अम्बेडकर जी ने इंटरव्यू में में साफ कहा कि अम्बेडकर सरनेम बाबा साहेब डॉ अम्बेडकर को उनके गरु जी से मिला। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि बाबा साहेब डॉ अम्बेडकर जी के पिता जी का सरनेम सकपाल था। एबीपी न्यूज के उस विडियो को आप हमारे केबीटी रिएक्शन यूट्यूब चैनल के विडियो पर सकते हैं।(टाइमिंग 5 से देखें)
एबीपी न्यूज की विडियो का वो अंश जहां प्रकाश अम्बेडर से खुद बताया की बाबा साहेब को अम्बेडकर सरनेम उनके ब्राम्हण गुरु जी से मिला।आप ये अंश देखें
प्रमाण सात
अब देखते है आंबेडकर जी के गुरु जी की तीसरी पीढ़ी क्यूकी ये लोग कहते है की, आंबेडकर सरनेम वाला कोई ब्राह्मण नहीं है, जबकि आंबेडकर जी के ब्राम्हण गुरु जी की तीसरी पीढ़ी आज भी है जो आबेडकर सरनेम लिखते है।

एल्ट न्यूज को हरि नरके जी ने बाबा साहेब के ब्राम्हण गुरु जी की तीसरी पीढ़ी का एक फोटो उपलब्ध कराया। आप फोटो में बाबा साहेब के ब्राम्हण गुरु जी की तीसरी पीढ़ी देख सकते हैं अतः यह कहना ग़लत होगा की आज कोई भी ब्राम्हण अम्बेडकर सरनेम वाला नहीं है।
अब कोई यह पूछे की हरि नरके जी कौन है जिन्होंने बाबा साहेब के ब्राम्हण गुरु जी की तीसरी पीढ़ी की फोटो दी, तो हम यहां बता देना चाहते हैं कि हरि नरके जी भारत सरकार द्वारा प्रकाशित डॉ अम्बेडकर सम्पूर्ण वाड्मय के संपादक हैं। अतः हरि नरके जी द्वारा दी गई जानकारी पर कोई संदेह नहीं होना चाहिए।

एक बात और, अगर कोई धनंजय कीर और खैरमोडे दवारा लिखित अम्बेडकर जी की जीवनी की प्रमाणिकता पर प्रश्न उठाता है
तो उसका जवाब यह है कि भारत सरकार दवारा प्रकाशित अंबेडकर संपर्ण वाडमय में धनंजय कीर और खैरमोडे की किताब को संदर्भ के रूप में लिखो गया है, इसी संपूर्ण वाड्मय खंड 10 से ये प्रमाण देते हैं।
धनंजय कीर को बाबा साहेब ने इंटरव्यू दिए, धनंजय कीर की पुस्तक बाबा साहेब के जीवन काल में ही प्रकाशित हुई।

अतः सारे प्रमाण से ये स्पष्ट हो जाता है कि बाबा साहेब डॉ अम्बेडकर के पिता जी का सरनेम अम्बेडकर नहीं था। उनका सरनेम सकपाल था।



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