डॉ. बी.आर अम्बेडकर ने लिखा कि सुमति भार्गव ने लोगो को धोखे में रखने के लिए मनुस्मृति नाम से नवीन संहिता लिखी। अम्बेडकर जी ने मनुस्मृति पर जो लिखा उसका पूरा संदर्भ यहां पढ़ें।
सुमति भार्गव नाम के एक व्यक्ति थे जिन्होने मनु संहिता की रचना की। सुमति भार्गव कोई काल्पनिक नाम नहीं है। अवश्य ही यह कोई ऐतिहासिक व्यक्ति रहा होगा।
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मनु निश्चय ही कोई व्यक्ति था। इस प्रकार मनु नाम सुमति भार्गव का छद्म नाम था और यह ही इसके वास्तविक रचयिता थे।
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मनुस्मृति की रचना ईसा पूर्व 185, अर्थात पुष्यमित्र की क्रांति के बाद सुमति भार्गव द्वारा की गई थी। इस विषय में मुझे अधिक कुछ नहीं कहना है।
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मनुस्मृति एक नवीन विधि-संहिता है, जिसे पुष्यमित्र के शासन काल में पहली बार प्रवर्तित किया गया था।
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प्राचीन भारतीय इतिहास में मनु की आदरसूचक संज्ञा थी।इस संहिता को गौरव प्रदान करने के उद्देश्य से मनु को इसका रचयिता कह दिया गया। इसमें कोई शक नहीं कि यह लोगों को धोखे में रखने के लिए किया गया।
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सुमति भार्गव ने इस संहिता की रचना ईसा पूर्व 170 और ईसा पूर्व 150 के मध्य-काल में की और इसका नाम जान-बूझकर मनुस्मृति रखा।
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डॉ अम्बेडकर की राइटिंग से स्पष्ट है कि मनु ने तो मानव धर्म संहिता लिखा। मनुस्मृति बौद्ध टाइम पीरियड में सुमति भार्गव ने लिखा गया। प्रश्न यह उठता है कि डॉ अम्बेडकर जी के अनुसार जब मनुस्मृति बौद्ध टाइम पीरियड में लिखा गया तो हजारों साल शोषण ब्राम्हण ने कैसे कर लिया?
इस विषय पर विस्तृत विडियो भी देख सकते हैं।



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