भारतीय संविधान में हिंदू को स्पष्ट परिभाषित किया गया।बौद्ध सिख जैन को भी हिंदू माना गया। आदिवासी को भी हिंदू माना गया।भारतीय संविधान, कानून में हिंदू कहां कहां परिभाषित है,इस पोस्ट सभी रिफरेंस पढ़िए।
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25, 2, बी में हिंदू को परिभाषित किया गया है।इस अनुच्छेद में बौद्ध जैन सिख को भी हिंदू माना गया है।


हिन्दू मैरिज एक्ट 1955, सेक्शन 2 में, हिंदू को परिभाषित किया गया है। इस एक्ट में वीरशैव, लिंगायत, बौद्ध,जैन,सिख, आर्य समाज, प्रार्थना समाज, ब्रम्ह समाज को हिंदू माना गया है।


हिंदू उत्तराधिकारी एक्ट, 1956, सेक्शन 2 में भी हिंदू को परिभाषित किया गया है। यहां भी जैन सिख बौद्ध वीरशैव लिंगायत आर्य समाज प्रार्थना समाज ब्रम्ह समाज को हिंदू माना गया है।


हिन्दू माइनोरिटी एंड गार्जियनशिप एक्ट 1956, सेक्शन 3,पर भी हिंदू को परिभाषित किया गया है। यहां भी जैन सिख बौद्ध आर्य समाज प्रार्थना समाज लिंगायत वीरशैव ब्रम्ह समाज को हिन्दू माना गया है।


हिन्दू एडोप्टेशन एंड मेनटेनेंस एक्ट 1956, सेक्शन 2 में हिंदू की परिभाषा है। यहां वीरशैव लिंगायत बौद्ध जैन सिख आर्य समाज प्रार्थना समाज ब्रम्ह समाज प्रार्थना को हिंदू माना गया हैं।


प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स एक्ट 1955,सेक्शन 3 में आदिवासी को हिंदू माना गया है।


भारतीय संविधान के अनुसार अनुसूचित जाति के लोग अनिवार्य रूप से हिंदू है। संवैधानिक आदेश 1950 में स्पष्ट है की अनुसूचित जाति केवल हिंदू हो सकते है, धर्म बदलने पर अनुसूचित जाति का दर्जा समाप्त हो जाएगा।

अतः भारतीय संविधान में हिंदू की परिभाषा स्पष्ट है।
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