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चाइना में सती प्रथा

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चाइनीज समाज मे बाल विवाह और सती प्रथा काफी प्रचलित और आम थी। इसके प्रमाण आठवीं ईसा पूर्व से मिलते हैं।
द कमेंट्री आफ जोऊ 722 पूर्व में विधवा सतित्व का उल्लेख मिलता हैं।
जिसमें जिगुई नाम की एक महिला के सतित्व की कथा है।

475 ईसा पूर्व में वेई राज्य के राजा ने अपने राज्य की एक महिला को गौक्सिंग पुरूस्कार दिया जिसका अर्थ सतित्व के महिमामंडन से था।

206 ईसा पूर्व हान राजवंश में बुद्धिज़्म का प्रभाव था एवं बुद्धिज्म के साथ ही सतित्व को समाज में फैलाने और महिमामंडन के लिए
लियू जियांग ने अनुकरनीण महिलाओं की जीवनी नाम से ग्रंथ लिखा ।

चाईनीज समाज में बाल विवाह आम था। कन्या के जन्म होते ही कन्या की शादी, उसके अभिभावक कर देते थे।
अगर उसके पति की मृत्यू ही गई तो उस महिला को समाज से अलग कर दिया जाता था, दूसरी शादी तो हो ही नहीं सकती थी। अकेले पन से तंग होकर उसे आत्महत्या करना पड़ता था।

कई बार महज दो या तीन वर्ष में ही विधवा हो जाती थी। और इन्हें दोबारा शादी का अधिकार नहीं था। चाइना में ये प्रथा प्राचीन थी , आठवीं ईसा पूर्व से प्रमाण मिलते हैं ।

हान राजवंश में विधवा सतित्व को प्रमोट किया गया।
शोंग राजवंश के समय विधवा सतित्व के लिए सख्त कानून बने एवं नव-कन्फ्यूशियंस के प्रसार से सतित्व धारणा सख्त हुई।

बाद के बौद्ध प्रभाव वाले राजवंशो ने सती प्रथा को मजबूत किया,महिलाओं के प्रति अत्याचार बढ़े ‌किन राजवंश (221 – 206 ईसा पूर्व)में कहा  गया कि विधवा पुर्नविवाह करती है तो वो बदचलन है।इसका प्रमाण सिमा क़ियान  द्वारा द रिकॉर्ड्स ऑफ़ द ग्रैंड हिस्टोरियन  में प्रलेखित किया गया था

जिन राजवंश (265 – 420) में, द बुक ऑफ जिन में विधवा सतित्व के प्रमाण मिलते हैं।
सुई राजवंश (581-618 ईस्वी) में, कानूनों ने विधवाओं के पुनर्विवाह पर प्रतिबंध लगाना शुरू कर दिया और विधवा के खिलाफ सख्त कानून बनाए।

प्रसिद्ध कवि बाई जुई ने महिलाओं का दुख नाम से कविता लिखी जिसमें महिला सतित्व का जिक्र है।
सोंग राजवंश (960 – 1279) में विधवा सतित्व पर जोर दिया गया और विधवा विवाह रोकने के लिए सख्त कानून बनाए गए।

नव-कन्फ्यूशियंस ने शुद्धता पर जोर दिया। इनके दार्शनिक पुस्तक रिफ्लेक्शन्स ऑन थिंग्स एट हैंड में विधवा विवाह को शर्मनाक बताया गया ।  चाइना में जब बुद्धिज्म आया तो इस  दर्शन ने भी विधवा सतित्व को बल दिया।

मिंग (1368-1644) और किंग (1616-1911) राजवंशों में, विधवा शुद्धता तेजी से प्रमुख हो गई। सरकार पवित्र विधवाओं को अकेले  रहने और दोबारा शादी न करने वाली महिलाओं को  प्रशंसापत्र देने लगी । ताकि अन्य महिलाएं भी बिना किसी विरोध के स्वेच्छा से अनुकरण करें।

किंग विद्वान फैंग बाओ ने कांग नाम की एक पवित्र महिला की जीवनी लिखी थी, जिसके बारे में कहा जाता है कि उसकी सगाई झांग जिंग नाम के एक गरीब व्यक्ति से हुई थी, जो शादी से पहले ही मर गया था। सगाई के बाद  से ही वो पत्नी हो गई।और पति के मरने के बाद वो विधवा हो गई।

कांग नाम की उस महिला को समाज के भय से अकेले रहना पड़ा। अकेले पन से परेशान होकर कांग ने खुद को फांसी लगा ली,  बाद में सरकार ने कांग के परिवार को के प्रशंसापत्र से सम्मानित किया।

इतिहासकार गुओ सोंगयी ने द जनरल हिस्ट्री ऑफ़ चाइनीज़ वीमेन  में कहा है कि किंग राजवंश में 1 मिलियन से अधिक महिलाओं को उनकी शुद्धता के लिए सरकार द्वारा सराहना मिली। और उनके परिवार वालों को प्रसंशा पत्र दिया गया।

मिंग राजवंश में विधवा सतित्व के महिमामंडन के लिए महान विधवा जिन्होंने अपने पति के मरने के बाद आत्महत्या की या गुमनामी अकेले पन का जीवन जिया उनकी याद में स्मारक बनाए गए जिन्हें पाइफांग कहते हैं।

सती प्रथा के महिमामंडन और प्रचार के लिए पाइफांग स्मारक, आज भी पूरे चाइना में देखें जा सकतें हैं।

चाइना में सती प्रथा के स्मारक

कुछ नामजद केस जो विधवा हुई और सतीत्व के लिए आत्महत्या किया
सती होने वाली चाइनीज महिलाओं के नाम
Zhang Zhongyu (,झांग झोंग्यू)
Huang Yijie (हुआंग यीजी)
sun Yinxiao,( सुन यिनझिओ)
Fu Xiaojie ( फु झिनओजी)
, Wang Yingjie’(वांग यिनग्जी)।

ये सब मिग राजवंश फुजियान प्रांत के केस है । ऐसे बहुत से केस documented है।
जो लोयल अन टू डेथ , जो की फुजियान प्रांत का लोकल इतिहास है, में मिल जाएगा, ebrey ने अपनी पुस्तक में इसका वर्णन किया है ।


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