हम सभी में सोशल मीडिया पर ऐसे फोटो जरूर देखें होंगे

ऐसे फोटो से यह झूठ फैलाने की कोशिश कि जाती है कि ब्राम्हण हिंदू कोड बिल के विरोधी थे।
जबकि 1921 में सबसे पहले हिंदू कोड बिल क़ानून की पहल विधान परिषद में महामहोपाध्याय गंगा नाथ झा ने किया था। ये एक ब्राम्हण थे।

1937 में महिला अधिकार के लिए कानून बनवाने वाली दूर्गाबाई देशमुख भी ब्राम्हण थी।
इस कानून को देशमुख एक्ट 1937 भी कहते हैं

1941 में बी एन राव ने हिंदू कोड बिल का ड्राफ्ट तैयार किया। ये भी ब्राम्हण थे।

और आज जो मौजूदा हिंदू कोड बिल जो भारत में लागू है उसे बनाने और पास कराने वाले हरि विनायक पाटस्कर भी ब्राम्हण है। इन्होंने हिंदू कोड बिल 1955 एवं 1956 में पास कराया

हिंदू कोड बिल एवं महिलाओं के अधिकार के लिए ब्राम्हण समुदाय से आने वाले लोगों ने सक्रिय काम किया। इसलिए ब्राम्हण को हिन्दू कोड बिल एवं महिला अधिकार के खिलाफ बताया एक दम ग़लत है।
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