पूरी दुनिया को लिबरल आर्ट्स और सेकुलरिज्म पर ज्ञान देने वाली अमेरिकी की सबसे प्रतिष्ठित येल यूनिवर्सिटी का इतिहास एक निर्दयता और क्रूरता से भरा है। ऐसे अपराध से येल यूनिवर्सिटी का इतिहास जुड़ा है जिसे कभी नहीं भुलाया जा सकता और न कभी इसकी माफी दी जा सकती।

दरअसल येल यूनिवर्सिटी पर काफी लंबे समय से स्लेव ट्रेड का आरोप लगता आ रहा था।
येल यूनिवर्सिटी ने इस आरोप की जांच के लिए शोध शुरू किया।
येल के इतिहासकार डेविड ब्लाइट के नेतृत्व में शोधकर्ताओं आरोपो को सही पाया। इसके बाद येल यूनिवर्सिटी ने अपने काले और क्रूर इतिहास के लिए सार्वजनिक माफी मांगी


दरअसल येल यूनिवर्सिटी का नाम इलिहू येल के नाम पर है।जो भारत में एक ब्रिटिश अफसर के रूप में काम किया। इस क्रूर इलिहू येल ने गुलाम बनाकर गुलामो का व्यापार से अच्छा धन कमाया और अमेरिका की येल यूनिवर्सिटी को भी खूब पैसा दिया, येल यूनिवर्सिटी का नाम इसी क्रूर इलिहू येल के नाम पर रखा गया है।

इलिहू येल अफ्रीकन और भारतीय को ब्लेक क्रिमिनल कहा। इसने अफ्रीकन और भारतीय को गुलाम बनाकर यूरोप में बेचा। येल यूनिवर्सिटी के भवन निर्माण में भी गुलामो से श्रम लिया गया।

ऐसे में येल यूनिवर्सिटी का केवल माफी मांगना पर्याप्त नहीं। इस यूनिवर्सिटी का नाम भी बदलना चाहिए। और हां येल यूनिवर्सिटी ने माफी जरूर मांगी है पर ऐसे अक्षम्य अपराध की माफी कभी नहीं दी जा सकती। येल यूनिवर्सिटी को कोई नैतिक आधार भी नहीं बनता की वो लिबरल सेकुलर और उन्हें समाजिक उदारता के विषय पर बात कर सकें। येल यूनिवर्सिटी की नींव ही क्रूर और काले इतिहास से भरा हैं।
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