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क्या भगवान श्री कृष्ण ही हरक्युलिस है?

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हरक्युलिस से संबंधित कथा और घटनाएं देखने से स्पष्ट हो जाता है कि हरक्युलिस की संपूर्ण अवधारणा भगवान श्री कृष्ण से कापी की गई है। हरक्युलिस की भगवान श्री कृष्ण से समानता यह भी दर्शाता है कि भारतीय संस्कृति का प्रभाव प्राचीन समय से ही विश्व कई क्षेत्रों में था।इस लेख में हम हरक्युलिस की उन घटनाओं का उल्लेख करेंगे जो भगवान श्री कृष्ण के घटनाओं से समानता दिखाते हैं।

पुतना और हेरा की कथा

पुतना ने श्री भगवान श्री कृष्ण जी को अपना स्तनपान कराकर उन्हें मारने की कोशिश,इसी कथा को हरक्युलिस से जोड़ा गया,यहां हेरा ने हरक्युलिस को अपने स्तनपान से मारने की कोशिश की।

पुतना और हेरा की कथा

कालिया नाग और हाइड्रा नाग का प्रकरण

भगवान श्री कृष्ण जी ने कालिया नाग को पराजित किया तो वहीं हरक्युलिस ने  कई फन वाले हाइड्रा नामक नाग को पराजित किया।

कालिया नाग और हाइड्रा नाग का प्रकरण

बकासुर और सिमफैलियन पक्षी का वध

भगवान श्री कृष्ण ने लंबी चोंच वाले बकासुर का वध किया तो वहीं हरक्युलिस ने लंबे चोच वाले सिमफैलियन पक्षी का वध किया

बकासुर और सिमफैलियन पक्षी का वध

क्रेटन बैल और  अरिष्टासुर बैल

हेराक्लीज़ द्वारा क्रेटन बैल तो  भगवान कृष्ण द्वारा अरिष्टासुर – बैल  को मारना।

क्रेटन बैल और  अरिष्टासुर बैल

हेरा और कंस

हरक्युलिस की सौतेली माँ हेरा और भगवान कृष्ण का मामा कंस दोनों में ही समानता है।भगवान श्री कृष्ण को कंस मारना चाहता था वहीं हरक्युलिस को सौतेली मां हेरा मारना चाहती थी।

डायोमेडिस और केशी  अश्व

हेराक्लीज़ डायोमेडिस के घोड़ों को तो भगवान कृष्ण केशी – अश्व दानव का संहार करते हैं।

डायोमेडिस और केशी – अश्व

राजपरिवार

भगवान श्री कृष्ण और हरक्युलिस दोनों राज परिवार से थे परंतु जन्म से राजपरिवार में नहीं रहे।

अब कुछ सवाल उठते हैं जैसे

मेगस्थनीज ने जिस हरक्युलिस के बारे में लिखा क्या वह श्री कृष्ण ही थें?


हरकुलिस और भगवान श्री कृष्ण में से किसके प्राचीन आर्कियोलॉजीकल प्रमाण मिलते हैं?


ग्रीक नाम और भारतीय नामों को गौर से देखने पर समानता दिखती है, क्या यह संयोग है या फिर भारतीय  नामों को ही ग्रीको द्वारा परिवर्तित किया गया?

सबसे पहले नामों में समानता देखते हैं

हरक्युलिस शब्द को गौर से  हरि कुल ईश शब्द मिलेगा, हरि भगवान विष्णु का नाम है और भगवान श्री कृष्ण विष्णु अवतार है, अतः प्राचीन समय में हरक्युलिस नाम भारत से लिया गया एवं भगवान श्री कृष्ण की कथा इससे जोड़ी गई।

मेगस्थनीज ने वर्णन किया है, “सौरासेनोई नामक एक भारतीय जनजाति, जो विशेष रूप से अपनी भूमि में हेराक्लीज़ की पूजा करती थी, और इस भूमि में दो शहर, मेथोरा और क्लीसोबोरा।

सौरसेनोई नाम पर गौर दीजिए यह शूरसेन वंश से मिलता है जो यादव वंश की शाखा है
जबकि मेथोरा-मथुरा और क्लीसोबोरा-कृष्णपुरा से मिलता है।
ये सारे  ग्रीक शब्द भारतीय शब्दों से बने हैं ।
इसका प्रमुख कारण यह भी है कि ग्रीक भारतीय शब्दों का उच्चारण ठीक नहीं कर पाते थे। इसलिए उन्होंने भारतीय उच्चारणों को अपने तरह किया साथ ही प्राचीन भारतीय संस्कृति से प्रभावित थे और उन्होंने इसे ग्रीक समाज में पहुंचाया।

अब भगवान श्री कृष्ण के कुछ आर्कियोलॉजिकल एवं कुछ अन्य प्रमाण देखेंगे

मैगस्थनीज के हेराक्लीज की श्रीकृष्ण के साथ समानता के कुछ तुलनात्मक प्रमाण देते हैं – diod. II. 35 – 42 में मैगस्थनीज को उद्धृत करते हुए लिखा है –

यहां हेराक्लीज को दंड धारी लिखा है। श्रीकृष्ण का प्राचीन शिला चित्रों और मुद्राओं पर निरुपण चक्र व दंड (गदा) धारी दिखता है। बलराम का भी ऐसा ही चित्रण है। दूसरा कथन है कि हेराक्लीज ने समुद्र व पृथ्वी को अनेकों दुष्ट जंतुओं से मुक्त किया था। इसकी तुलना हम कृष्ण द्वारा बकासुर, कालिया, केशी, वत्सासुर आदि के मर्दन या वध से कर सकते हैं।
अनेक विवाह और अनेक पुत्र व एक पुत्री का कथन भी श्रीकृष्ण से तुलना किया जा सकता है, क्योंकि श्री कृष्ण के अनेकों पत्नियों, पुत्रों तथा एक पुत्री का उल्लेख अनेकों ग्रंथों में है। उनकी एक पुत्री चारुमति का नाम अनेकों स्थानों पर है –

इसी तरह मैगस्थनीज ने शोरसेनियों के ईष्ट के रुप में हेराक्लीज को लिखा है –

Edwin f. Bryant

Edwin f. Bryant ने भी हेराक्लीज की पहचान कृष्ण के रुप में की है। उन्होंने मेगास्थिनीज द्वारा उद्धृत वर्णन के विषय में लिखा है –

Edwin f. Bryant के अनुसार मेगास्थिनीज द्वारा उल्लेखनीय हेराक्लीज जिसकी पूजा शोरसेनी लोग करते हैं, वह कृष्ण या हरे कृष्ण हैं। तथा शोरसेनी और उसके दो शहरों के नाम जैसे मेथोरा और क्लेशिबोरा क्रमशः मथूरा और कृष्णपुरा के समानांतर है। ये स्थल कृष्ण के जन्मस्थान और पूजा के लिए प्रसिद्ध हैं। जोबारिश नदी की समानता जमुना से की गयी है। edwin f. Bryant ने यह भी लिखा है कि ग्रीक लेखक प्रायः दूसरे देशों के देवों का वर्णन, अपने ग्रीक देवों की तरह करते थे। इतना ही नहीं हेराक्लीज की तस्वीर पोरस के सैनिकों के झंडों पर भी थी।

मौर्य कालीन प्रमाण

मौर्य कालीन शिवपुरी मध्यप्रदेश से प्राप्त तिकला से शैलचित्र पर श्रीकृष्ण, बलराम जी

मौर्य कालीन शैल चित्र श्री कृष्ण और बलराम

पंचमार्क सिक्का

मौर्य कालीन पंच मार्क सिक्के पर कृष्ण बलराम देखें जा सकते हैं।

पंचमार्क सिक्का
पंचमार्क सिक्का

मौर्य सिक्के पर श्रीकृष्ण

400 ईसापूर्व के सिक्कों पर श्रीकृष्ण और बलराम –
मौर्य सिक्के के दोनों तरफ बलराम और श्रीकृष्ण।
इससे पहले हम 1000 ईसापूर्व में भी श्रीकृष्ण के प्रमाण दे चुके हैं।

मौर्य सिक्के पर श्रीकृष्ण

भारत आए ग्रीक शासक भी कृष्ण भक्त थे।

भारत आए ग्रीक शासक भी कृष्ण भक्त थे। इसका उदाहरण विदिशा के गरुड ध्वज स्तम्भ पर है।
दूसरा अगाथकोलिस नामक शासक ने अपने सिक्के पर श्री कृष्ण और बलराम का अंकन करवाया था।

अगाथकोलिस नामक शासक ने अपने सिक्के पर श्री कृष्ण और बलराम का अंकन करवाया था।

शैल चित्र

गांधार से कृष्ण और बलराम जी के शैलचित्र –

गांधार से कृष्ण और बलराम जी के शैलचित्र -1
गांधार से कृष्ण और बलराम जी के शैलचित्र -2
गांधार से कृष्ण और बलराम जी के शैलचित्र -3

इजिप्ट में भी कृष्ण

इजिप्ट में भी कृष्ण, बलराम और एकनंशा की मुर्तियां मिली है।

इजिप्ट में भी कृष्ण

ग्रीक मोजेक

ग्रीक मोजेक चित्र पर गो सहित एक बंशी वादक है। जो कि श्रीकृष्ण के वर्णन से मिलता जुलता है।

ग्रीक मोजेक

द्वारिका की मुहर

द्वारिका की मुहर कार्बन डेटिंग पर यह मुहर कम से कम 3500 वर्ष पुरानी है।

3500 वर्ष पुरानी मुहर

गुफा पेटिंग

800 BC की एक गुफा पेटिंग मिर्जापुर (यूपी) में प्राप्त  हुआ है। जिसमें रथ पर आसीन योध्दा के हाथ में चक्र है

श्री कृष्ण की 800 BC की एक गुफा पेटिंग

कुषाण राजा

बैक्ट्रिया और उत्तर भारत के अंतिम कुषाण राजा ने अपना नाम वासुदेव प्रथम (लगभग 200 ई.पू.) रखा और शिल्लकों पर कृष्ण की सवियों अंकित करके सम्मान किया।

शिल्लकों पर कृष्ण

उपसंहार

हमने भगवान श्री कृष्ण के,हरक्युलिस से प्राचीनतम प्रमाण इस लेख में बताएं है। चूंकि प्रमाणों के आधार पर भगवान श्री कृष्ण, हरक्युलिस से प्राचीन सिद्ध होते हैं,और साथ ही  इस लेख में हरक्युलिस की उन घटनाओं का उल्लेख किया जो भगवान श्री कृष्ण के लीलाओं की नकल या प्रेरित लगती है।
अतः सिद्ध होता है कि हरक्युलिस भगवान श्री कृष्ण से ही प्रेरित एक पात्र है।


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