भारत में कुछ लोग स्वयं को बौद्ध धर्म का अनुयायी बताते हुए हिंदू धर्म की मान्यताओं और परंपराओं को अंधविश्वास और पाखंड करार देते हैं। सोशल मीडिया और व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी के तथाकथित विद्वानों की यह आदत बन गई है कि वे हिंदू धर्म की आलोचना तो करते हैं, लेकिन अपने ही धर्म के ग्रंथों को पढ़ने और समझने का प्रयास नहीं करते।
बौद्ध ग्रंथों में अंधविश्वास
जब बौद्ध अनुयायी हिंदू पुराणों में देवी-देवताओं के चमत्कारिक जन्मों का उपहास करते हैं, तो क्या उन्हें अपने स्वयं के ग्रंथों में दर्ज चमत्कारिक घटनाओं पर भी नजर डालनी चाहिए? यदि वे अपने पवित्र ग्रंथों को पढ़ें, तो शायद वे स्वयं अपनी आलोचना का शिकार बन जाएंगे।
बौद्ध धर्म के सबसे महत्वपूर्ण ग्रंथों में से एक “मिलिंद प्रश्न” (Milindapanha) है, जो बौद्ध त्रिपिटकों के बाद सबसे अधिक मान्यता प्राप्त ग्रंथों में शामिल है। इसमें बौद्ध भिक्षु नागसेन और भारत-यूनानी राजा मिलिंद (मेनेन्डर) के बीच संवाद दर्ज है। इस ग्रंथ में गर्भधारण से जुड़ी कई अजीबोगरीब मान्यताओं का वर्णन किया गया है, जो यह दर्शाती हैं कि अंधविश्वास केवल हिंदू धर्म तक ही सीमित नहीं था।
मिलिंद प्रश्न में दर्ज अजीबोगरीब गर्भधारण सिद्धांत
1. अंगूठे के स्पर्श से गर्भधारण
“मिलिंद प्रश्न” के अनुसार, दुकुल नामक तपस्वी ने पारिका नामक तपस्विनी की नाभि को उसके मासिक धर्म के दौरान अपने दाहिने हाथ के अंगूठे से छू दिया। इस स्पर्श के कारण वह गर्भवती हो गई और उसने मांडव्य नामक पुत्र को जन्म दिया।
मूल पाली :
“तापसेन पारिकाय तापसिया उतुनिकाले दक्खिणेन हत्थङ्गुट्ठेन नाभि परामट्ठा, तस्स तेन नाभिपरामसनेन सामकुमारो निब्बत्तो।”
यह कथा न केवल अवैज्ञानिक है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि हिंदू ग्रंथों की आलोचना करने वाले बौद्ध अनुयायियों को पहले अपने ग्रंथों पर ध्यान देना चाहिए।
2. मुंह से वीर्य ग्रहण करने से गर्भधारण
एक अन्य कथा में, उदायी नामक स्थविर (बौद्ध संत) एक भिक्षुणी के पास गए। भिक्षुणी को देखकर उनके मन में वासना जागृत हुई और उन्होंने अपने वस्त्र में वीर्यपात कर दिया। बाद में, जब भिक्षुणी ने वह वस्त्र धोया, तो उसने वीर्य का एक भाग निगल लिया और दूसरा भाग अपनी योनि में डाल लिया, जिससे वह गर्भवती हो गई और कुमार कश्यप का जन्म हुआ।
मूल पाली :
“थेरस्स उदायिस्स भिक्खुनुपस्सयं उपगतस्स रत्तचित्तेन भिक्खुनिया अङ्गजातं उपनिज्झायन्तस्स सम्भवं कासावे मुच्चि।”
3. हंसी-मजाक से गर्भधारण
“मिलिंद प्रश्न” में यह भी वर्णित है कि सिर्फ हंसी-मजाक करने, आंखों से इशारा करने या हल्के स्पर्श से भी महिलाएं गर्भवती हो सकती हैं।
मूल पाली :
“ऊहसनम्पि सन्निपातो, उल्लपनम्पि सन्निपातो, उपनिज्झायनम्पि सन्निपातो।”
4. हवा और बादलों की गर्जना से गर्भधारण
इस ग्रंथ में एक और हास्यास्पद दावा किया गया है कि मुर्गियां हवा से और बगुले बादलों की गर्जना से गर्भवती हो जाते हैं।
मूल पाली :
“कुक्कुटानं, महाराज, वातेन गब्भावक्कन्ति होति। बलाकानं मेघसद्देन गब्भावक्कन्ति होति।”
निष्कर्ष
इन कथाओं से यह स्पष्ट हो जाता है कि अंधविश्वास केवल हिंदू धर्म में नहीं, बल्कि बौद्ध धर्म के प्राचीन ग्रंथों में भी प्रचुर मात्रा में मौजूद था। यदि हिंदू धर्म के ग्रंथों में कुछ चमत्कारिक जन्म की कथाएं हैं, तो बौद्ध धर्म में भी उनसे कम हास्यास्पद बातें नहीं लिखी गई हैं।
जो लोग हिंदू धर्म की आलोचना करते हैं, उन्हें पहले अपने ग्रंथों को पढ़ना चाहिए और समझना चाहिए कि वे भी उतने ही अंधविश्वासों से भरे हुए हैं। यह कहना गलत नहीं होगा कि भारतीय उपमहाद्वीप में चमत्कारिक जन्म और अजीबोगरीब धार्मिक मान्यताओं की परंपरा बौद्ध ग्रंथों से ही शुरू हुई थी।
इस विषय पर अधिक जानकारी के लिए आप “मिलिंद प्रश्न” ग्रंथ को स्वयं पढ़ सकते हैं।
पुस्तक डाउनलोड करने के लिए लिंक:
Milindapanha – ई-पुस्तकालय
आपकी राय क्या है?
क्या आपको लगता है कि बौद्ध ग्रंथों में भी वही चीजें हैं, जिनका मजाक बौद्ध अनुयायी हिंदू ग्रंथों में देखते हैं? अपने विचार हमें कमेंट में बताएं और इस जानकारी को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाए!
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