सोशल मीडिया पर वामपंथीयो द्वारा एक जबरदस्त प्रोपोगेंडा फैलाया जा रहा है कि स्वामी विवेकानंद जी ने कहा कि जगन्नाथ मंदिर एक बौद्ध स्थल है।इसका मकसद केवल हिन्दू स्थलों पर विवाद को उत्पन्न करना और हिंदूओ के आस्था पर प्रहार करना हो सकता है। क्योंकि इस तरह के आधार हीन क्लेम का तथ्यों से दूर दूर तक कोई लेना देना नहीं है। वामपंथी अपने प्रपोगेंडा को अब स्वामी विवेकानंद जी के नाम पर आगे बढ़ा रहे हैं।आज हम इसी विषय पर तथ्यों के आधार पर बात करेंगे।
आइए सबसे पहले इनके क्लेम देखते हैं
स्वामी विवेकानंद जी के पुस्तक के एक अंश को कोट करते हुए, उस अंश का ग़लत अर्थ निकालकर यह प्रचारित किया जाता है कि स्वामी विवेकानंद जी जगन्नाथ मंदिर को बौद्ध मंदिर बताया। नीचे पुस्तक के उस अंश को आप देख सकते हैं।यह अंश स्वामी विवेकानंद संपूर्ण खंड भाग 3 में प्रकाशित है।

अब स्वामी विवेकानंद संपूर्ण खंड भाग 3 के रिफरेंस को समझते हैं
हमने इस प्रकरण को जिसे लेकर प्रोपोगेंडा फैलाया जा रहा है उसे गूगल लेंस के द्वारा हिन्दी में अनुवाद किया। मूल अंग्रेजी भी दिखाया, कोई चाहे तो मूल अंग्रेजी से भी मिलान कर सकते हैं।
Re-hinduised शब्द देखें
अगर स्वामी विवेकानंद संपूर्ण खंड भाग 3 के रिफरेंस को ध्यान से पढ़ेंगे तो यहां विवेकानंद जी यह लिखते हैं कि “पुनः या फिर से हिंदू बनाया गया दिया गया”अतः इस कथन से स्पष्ट होता है कि मूल रूप से जगन्नाथ हिंदू स्थल था, जहां बाद में कोई बौद्ध मंदिर बना दिया गया,और बाद में फिर से उसे हिंदू बनाया गया।इसलिए विवेकानंद जी ने re – hinduised (हिंदी अनुवाद में, पुनः हिंदू बनाया गया) शब्द उपयोग हुआ। अतः विवेकानंद जी स्वयं जगन्नाथ को मूल हिंदू ही मानते थे।

बौद्ध रचनाएं पतित एवं पाशविक
इसी पुस्तक के इसी प्रकरण में विवेकानंद बौद्ध रचनाओ को पतित एवं पाशविक बताते हैं।

बौद्ध पुराने धर्म में लौटने लगे
इसी पुस्तक के इसी प्रकरण में विवेकानंद जी लिखते है कि बौद्ध पुराने धर्म में लौटने लगे, अतः बौद्ध मत के पहले हिंदू धर्म था।

अश्लील किताबें
इसी पुस्तक के इसी प्रकरण में विवेकानंद जी लिखते है कि बौद्ध मत के बाद भयानक अनुष्ठान और अश्लील किताबें मानव के हाथो लगी।

प्राचीन शुद्धता
इसी पुस्तक के इसी प्रकरण मैं विवेकानंद जी लिखते हैं कि “शंकराचार्य भारतीय संसार को उसके प्राचीन शुद्धता में लाना चाहते थे” यहां भी स्पष्ट होता है कि बौद्ध मत हिन्दू धर्म के बाद आया जिसने भारतीय संसार के प्राचीन शुद्धता को नष्ट किया।

विवेकानंद जी का बौद्ध मत पर अन्य विचार
यहां हम संक्षिप्त में विवेकानंद जी का बौद्ध मत को लेकर क्या विचार था वह बता रहे हैं, साथ ही सवाल वामपंथीयो एवं नवबौद्धो से होगा की क्या विवेकानंद जी के इन बातों को वो मानेंगे?
विवेकानंद जी ने कहा ” बुद्ध एक महान वेदांती थे”।
बौद्ध मत से पहले, वेदान्त चीन, फारस और पूर्वी द्वीपसमूह के द्वीपों में प्रवेश कर चुका था।बुद्ध हिंदू धर्म के सुधारक थे।वेदांत दर्शन बौद्ध मत और भारत में बाकी सभी चीजों का आधार है।
संदर्भ –
1.मद्रास में 1892-1893 में दिए गए व्याख्यान
2.Friday, 19July 1985 – Inspired Talks
3.Speech at the Triplicane Literary Society, Madras
4.बुद्ध पर भाषण , स्वामी विवेकानंद,सैन फ्रांसिस्को .18 मार्च 1900
उपसंहार
किसी भी मंदिर का इतिहास पता करने के लिए पुरातत्व और मंदिर की वास्तुकला, समय आदि को देखा जाता है। स्वामी विवेकानंद जी के पुस्तक में जो विचार मिलते हैं वो उनके दार्शनिक विचार है।इन दार्शनिक विचारों को वामपंथीयो एवं नवबौद्धो ने तोड़ मरोड़ कर पेश किया, जबकि स्वामी विवेकानंद जी ने कभी यह नहीं कहा कि जगन्नाथ एक मूल बौद्ध स्थल था। बल्कि उनके बातों से यह स्पष्ट होता है कि मूल रूप से जगन्नाथ एक हिंदू स्थल था।



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