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क्या सच में राम नाम लिखे पत्थर तैरते थे?

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“रामायण एक ऐसा ग्रंथ हैं जो हजारों वर्षों से हम भारतीयों के लिए प्रेरणा का स्रोत रहा हैं। भगवान श्री राम चंद्र जी के रूप में ईश्वर ने स्वयं अपने मर्यादित लोक कल्याणकारी स्वरूप का दिग्दर्शन करवा कर मानवों मानवीय मूल्यों में बांधने का प्रयत्न किया हैं।”

Setubandhan

रामायण एक ऐतिहासिक महाकाव्य हैं, जिसके माध्यम से महर्षी वाल्मीकि जी ने भगवान श्री राम चंद्र जी के परम पावन स्वरूप का वर्णन किया हैं। रामायण को लेकर आज भी सैकड़ों डिबेट चर्चा परिचर्चा होती रहती हैं। जो होनी भी चाहिए … क्यों की बात भी उसी की होती है, जिसमें कुछ बात हो।

आज हम लोग रामायण से जुड़े एक लोक वृतांत के ऊपर बात करेंगे, जो आज समाज में बहुत जी ज्यादा प्रचलन में हैं। लोक जनश्रुति में यह बात सुनने को मिलती है कि जब भगवान श्री राम चंद्र जी समुद्र को साधने के लिए पुल का निर्माण कर रहे थे। तब पुल निर्माण के लिए उपयोग किए जा रहे पत्थरों पर, राम जी का नाम लिख कर उन्हें समुद्र में डाला जाता था।

इस जनश्रुति की आड़ लेकर कुछ राम द्रोही यह सवाल उठाते हैं कि उस समय वानरों को लिखना पढ़ना किसने सिखाया था। उस समय राम नाम किस भाषा या लिपि में लिखा जा रहा था। ऐसे सैकड़ों प्रश्न कुंठित मनोदशा से उठाए जाते हैं।

Ramsetu

चुकी यह लोक जनश्रुति बहुत ही प्रसिद्ध हैं। ऐसे में इस प्रकरण को मूल महर्षि वाल्मिकी रामायण से जांचे तो महर्षि वाल्मिकी द्वारा विरचित रामायण में ऐसा कोई प्रसंग हैं ही नहीं।

वाल्मीकि जी ने यह कही नहीं लिखा कि सेतु बंधन के समय पत्थरों पर राम नाम लिख कर उन्हें समुद्र में डाला जाता था। सेतु बंधन का प्रकरण वाल्मिकी रामायण के युद्धकांड के सर्ग 22 में आता हैं। 

Valmiki Ramayana

इस सर्ग में समुद्र स्वयं को साधने के लिए सेतु बनाने का भगवान राम से आग्रह करता हैं। साथ ही विश्वकर्मा जी के औरास पुत्र नल को समुद्र पर सेतु बनने के लिए उपयुक्त बता कर अदृश्य हो जाता हैं। 

Valmiki Ramayana- Sarga 22

तब नल अपना परिचय देते हैं और बताते हैं कि मैं सेतु बनाने में समर्थ हूं। उसके बाद पूरी वानर सेना पुल निर्माण के कार्य में लग जाती हैं।

Valmiki Ramayana- Sarga 22

वानर बड़े बड़े पर्वत शिखर वृक्ष आदि को तोड़ कर समुद्र तट पर लाना प्रारंभ कर देते हैं। बड़े बड़े वृक्ष और भारी भरकम चट्टानों को वानर यंत्रों के माध्यम से समुद्र तट तक कुशलता से पहुंचा देते हैं। यहां ध्यान देने योग्य बात है कि प्रश्न यह भी उठाया जाता है बड़े बड़े चट्टान पर्वत शिखर वानर कैसे समुद्र तट तक लाए तो यह उस बात का उत्तर है कि यंत्रों के माध्यम से। उस समय भी विभिन्न प्रकार के यंत्र प्रयोग में लाए जाते थे। ऐसा इस उद्धरण से पता चलता हैं।

Valmiki Ramayana- Sarga 22

कुछ वानर सेतु हेतु सामग्रियां लाते हैं कुछ बड़े बड़े वृक्षों और पर्वत शिखरों को समुद्र में फेक कर उससे सेतु निमार्ण का कार्य करते हैं। नाना प्रकार के वृक्ष पेड़ लता से सारे वानर समुद्र को पाटने लगते हैं। जब बड़े बड़े वृक्ष पत्थर और पर्वत शिखर समुद्र में फेंके जाते थे तो बड़ा भयंकर शब्द सुनाई देता था। समुद्र की लहरें फेंके गए चट्टानों और पेड़ो वृक्षों से सहसा ऊपर को उठ जाती थीं।

Valmiki Ramayana- Sarga 22
Valmiki Ramayana- Sarga 22

यहां आप देख सकते हैं सेतु बंधन का वर्णन कुछ इस प्रकार महर्षि वाल्मिकी जी ने रामायण में किया है। किंतु किसी स्थान पर यह बात नहीं लिखी है कि समुद्र में फेंके जाने वाले पत्थरों पर राम नाम लिखा जाता था। यह सिर्फ एक लोक जनश्रुति हैं। जिसका वास्तविकता से दूर दूर तक कोई लेना देना नहीं हैं।

Mahrshi Valmiki

इसी के साथ एक गिलहरी द्वारा सेतु निर्माण में भाग लेने की जनश्रुति भी शामिल है, उसका भी वाल्मीकि रामायण में कही वर्णन नहीं हैं। यह सब प्रकरण लोक कथा और लोक मान्यता के कारण भगवान श्री राम चंद्र जी के जीवन वृत्तांत के साथ जुड़ते चले गए हैं। किंतु वास्तव में इन घटनाओं का श्री राम चंद्र जी से कोई सम्बन्ध नहीं हैं।

Ramayana

अतः जो मूढ लोग पत्थरों पर राम नाम लिख कर तैराने वाली बात का मजाक बनाते हैं। या ऐसे मूढ लोगो के द्वारा उठाए जा रहे प्रश्नों से जो लोग घबरा कर रामायण के सेतु बंधन प्रसंग पर अपनी धारणाओं मान्यताओं के बीच में गोते खाने लगते हैं। इन दोनों की प्रकार के लोगो को जीवन में एक बार स्वयं से वाल्मिकी रामायण का अध्ययन अवश्य करना चाहिए।

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2 responses to “क्या सच में राम नाम लिखे पत्थर तैरते थे?”

  1. RAJESH KUSHWAHA Avatar

    VERY USEFULL KNOWLEDGE

    1. Is post ke author toh aap khud ho

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