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क्या जगन्नाथ मंदिर बौद्ध स्थल है?

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अनेकों नवबौद्ध वर्षों से यह आक्षेप कर रहे हैं कि जगन्नाथ मंदिर बौद्ध स्थल है। इस संदर्भ में अनेकों पुस्तकें भी लिखी गई है। हालांकि सभी पुस्तके एक दूसरे की नकल है। हम यहां आज कुछ प्रमुख आक्षेप जो कि जगन्नाथ मंदिर के बौद्ध स्थल होने पर लगाए जाते हैं, उसका प्रत्युत्तर प्रस्तुत कर रहे हैं।

क्या जगन्नाथ मंदिर के ऊपर धम्मचक्क है?

नव बौद्धों द्वारा जगन्नाथ मन्दिर को बौद्ध स्थल बताने का एक प्रमुख कारण यह भी है कि वो इस स्थल के शीर्ष पर धम्म चक्र बताते हैं। जबकि चक्र का सम्बन्ध वैष्णव सम्प्रदाय से है। उडीसा के अनेकों वैष्णव मंदिरों पर चक्र है। कुछ मंदिरों में चक्र के अंदर भगवान विष्णु या योग नारायण का भी अंकन है। जो यह दर्शाता है कि चक्र होने मात्र से किसी स्थल को बौद्ध नहीं कहा जा सकता है।

जैसे यहां अयोध्या के एक मंदिर से प्राप्त चक्र है, जिसमें अंदर योग नारायण भी है।(चित्र एक)

चित्र एक

यह चक्र भुवनेश्वर से प्राप्त हुआ था। इसमें भी योग नारायण का अंकन है।(चित्र दो)

चित्र दो

यह खिचिंग संग्रहालय में सुरक्षित है, इसमें भी योग नारायण है।इनके चारों ओर नवग्रह भी है। (चित्र तीन)

चित्र तीन

जगन्नाथ में मुर्तियों किसकी पूजा होती है

भगवान कृष्ण को मिलाकर तीन प्रतिमाओं के पूजन की परम्परा बहुत प्राचीन है। इनमें भगवान वासुदेव, बलराम और एकनक्षा का पूजन होता है। इनकी प्रतिमाओं का उल्लेख वृहद संहिता में भी है। मथुरा, पटना, हरियाणा से ऐसी अनेकों प्रतिमाएँ मिली हैं, जो कि कुषाण कालीन है और उसमें तीनों का अंकन है। जबकि हमें बुद्ध की ऐसी कोई प्रतिमा नहीं मिलती है, जिसमें उनके साथ कोई स्त्री पत्नि, बहन हो और न ही भाई आनन्द के साथ कोई प्रतिमा मिलती है।

क्या जगन्नाथ मंदिर में मुर्तियां त्रिरत्न है?

त्रिरत्न का कोई भी चिह्न बौद्ध ग्रंथों में नहीं है। अन्य बौद्ध स्तूपों पर भी पुराने चिह्न नंदिपदम्, चक्र, श्रीवत्स को मिलाकर त्रिरत्न बना देतें हैं। जबकि जगन्नाथ जी की प्रतिमा लकडी की मानव प्रतिमा है और ये बार बार बनती है।

यहां आप बिना श्रंगार के प्रतिमा देख सकते हैं, क्योंकि ये कहते हैं कि प्रतिमा को वस्त्र हटाए तो यह बुद्ध या त्रिरल होगा। जबकि यहां मानव आकृति हैं। श्रंगार सहित मुर्ति भी देखें- यहां रंग के द्वारा भी वासुदेव, बलराम और एकनक्षा को दर्शाया है।

ये कोणार्क से राजा नरसिंह देव का अंकन है, जिसमें वे जगन्नाथ जी की पूजा कर रहे हैं, यहां जगन्नाथ जी के साथ शिवलिंग, महिषासुरमर्दिनी आदि हिंदू देव ही है। (चित्र चार एवं पांच)

चित्र चार
चित्र पांच

जगन्नाथ स्थल से अन्य वैष्णव प्रतिमा-

इस स्थल से भगवान विष्णु के त्रिविक्रम रुप की भी प्रतिमा मिली थी। जो कि इस स्थल के वैष्णव स्थल होने को प्रमाणित करता है। (चित्र छह)

चित्र छह

इन सब प्रमाणों से स्पष्ट है कि जगन्नाथ एक हिन्दू स्थल है। जगन्नाथ जी वासुदेव जी हैं, न कि बुद्ध हैं। जगन्नाथ जी के प्राचीन अंकन भी हिन्दू देवों के साथ है, न कि बौद्धों के या बुद्ध के साथ।

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2 responses to “क्या जगन्नाथ मंदिर बौद्ध स्थल है?”

  1. wingedwizard8281e025f1 Avatar
    wingedwizard8281e025f1

    जय हो ☺️🙏🏻❤️

  2. Aere ien bhimato ko expose kr kr ke nanga v kr do fir v ye kehenge – hum nhi sudharenge.
    Bs ek kaam me inka PhD certificate hai wo hai – copy -paste.inka wajood ies per hie hai jaise hie inka copy -paste system carsh ho jayega waise hie ye rone dhone lagenge .

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