नव बौद्धों द्वारा बुद्ध को नागवंशी बताया जाता है। नागवंश के इतिहास से बुद्ध को जोड दिया जाता है। किन्तु त्रिपिटक साहित्य जगह – जगह बुद्ध को सूर्यवंशी, इक्ष्वाकु वंशी कहते हैं।
ऐसे ही सुत्तपिटक के संयुत्त निकाय के पहले खंड के आठवें अध्याय वङ्गी संयुक्त के 7 वे सुत्त पवारणसुत्त में बुद्ध को सुर्यवंशोत्पन्न कह कर नमन किया गया है।

यहां कुछ लोग मिलावट कह कर इस चीज से बचने की कोशिश करेगें।
किंतु यहां इसी सुत्त की ब्राह्मी लिपि में तुर्किस्तान से प्राप्त पांडुलिपि भी है।

जिसमें स्पष्ट बुद्ध को आदित्यबान्धवम् लिखा है अर्थात आदित्य के परिवार या वंश से।
इस पांडुलिपि पाठ की तुलना वर्तमान पालि पाठ से भी देखी जा सकती है –

अतः निष्कर्ष निकलता है कि बुद्ध सूर्यवंशी थे। न कि नागवंशी।
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